विदेशी जेल में बंद चोकसी पर भारत में फिर कानूनी कार्रवाई तेज, आयकर विभाग की याचिका पर कोर्ट का नोटिस

मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी. चोकसी फिलहाल बेल्जियम की जेल में बंद है और इस केस में कई अन्य आरोपी भी शामिल हैं. सेशंस कोर्ट के फैसले से चोकसी और उनके सहयोगियों की कानूनी स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है. मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी.

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मेहुल चोकसी को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ आयकर विभाग सेशंस कोर्ट पहुंचा मेहुल चोकसी को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ आयकर विभाग सेशंस कोर्ट पहुंचा

विद्या

  • मुंबई ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

आयकर विभाग ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और उनके सहयोगियों को राहत देने वाले मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को मुंबई की सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले में सेशंस कोर्ट ने चोकसी को नोटिस जारी किया है. फिलहाल मेहुल चोकसी बेल्जियम की एक जेल में बंद है.

सेशंस कोर्ट अब आयकर विभाग की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर 26 मार्च को अगली सुनवाई करेगा. यह याचिका बॉलार्ड पियर मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें चोकसी को एक मामले में डिस्चार्ज कर दिया गया था.

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दरअसल, साल 2018 में आयकर विभाग ने मेहुल चोकसी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत शिकायत दर्ज की थी. यह मामला हैदराबाद जेम्स एसईजेड लिमिटेड और चोकसी द्वारा प्रमोट की गई अन्य कंपनियों से जुड़ा है. विभाग का आरोप था कि चोकसी ने इन कंपनियों में कुछ लोगों को डमी डायरेक्टर और पार्टनर के तौर पर नियुक्त किया था, जो कंपनी के खातों से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सके.

इसी सिलसिले में फरवरी 2018 में आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 के तहत चोकसी और उनसे जुड़ी कई जगहों पर सर्च और जब्ती की कार्रवाई भी की थी. हालांकि, दिसंबर 2024 में मेहुल चोकसी को समन तामील न होने के चलते उनके खिलाफ ट्रायल को अलग कर दिया गया था, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रही.

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आयकर विभाग का कहना है कि सितंबर 2025 में मामला चार्ज से पहले सबूत पेश करने के लिए सूचीबद्ध था. उस दौरान कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न होने की वजह से विभाग ने थोड़े समय की मोहलत मांगी थी. लेकिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बिना मौका दिए कार्यवाही बंद कर दी और आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया.

विभाग ने अपनी याचिका में कहा है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बिना विभाग को पूरा और निष्पक्ष अवसर दिए यह आदेश पारित कर दिया, जो कानून के खिलाफ है. विभाग का तर्क है कि सिर्फ इस आधार पर कि मामला लंबे समय से लंबित था और आगे नहीं बढ़ पाया, कार्यवाही बंद करना और आरोपियों को राहत देना गंभीर अन्याय है.

इस मामले में चोकसी के अलावा मुंबई निवासी सुधीर मेहता, कौशिक नाइक, मिलिंद लिमये और मुकेश विसावड़िया आरोपी हैं. वहीं, ठाणे निवासी अनियत नायर और सूरत के जितेंद्र पारिख तथा तपन जोगानी भी इस केस में अभियोजन का सामना कर रहे थे. अब सेशंस कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे मेहुल चोकसी और उनके सहयोगियों की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं.

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