मौसम विभाग ने चेताया है कि दो लगातार पश्चिमी विक्षोभ इस हफ्ते उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर रहे हैं. शुक्रवार के बाद अब शनिवार और मंगलवार को इनकी सबसे ज्यादा सक्रियता रहेगी. कश्मीर घाटी में कुछ जगहों पर भारी बारिश और बारीक ओलों के गिरने की संभावना है, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओलों के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक का खतरा बढ़ा हुआ है.
मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में भी मौसम अस्थिर बना रहेगा. आज पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश और ओलों का अलर्ट जारी किया गया है. इसी बीच उत्तर-पश्चिमी भारत में तेज हवाओं और गरज-चमक का असर भी देखा जाएगा.
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत भी मौसमी सक्रियता से अछूते नहीं हैं. अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है. तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और आंतरिक कन्याक में भी बारीक ओलों और तेज हवाओं का असर रहेगा.
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि पर्वतीय और संवेदनशील इलाकों में ओलों, तेज हवाओं और गरज-चमक से खतरा बढ़ा हुआ है. ऐसे में बाहरी गतिविधियों और यात्रा में सतर्कता जरूरी है और पहाड़ी इलाकों में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है.
दिन का तापमान उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत में सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है, जिससे मौसम ठंडा और अस्थिर बना रहेगा. मार्च में देश पर आठ पश्चिमी विक्षोभों का असर पड़ा, जबकि सामान्य तौर पर पांच या छह ही होते हैं.
पश्चिमी विक्षोभ क्या हैं?
ये पूर्व की ओर बढ़ने वाली, बारिश लाने वाली हवाओं के रूप में आते हैं. जो अफगानिस्तान और ईरान के पार से उत्पन्न होते हैं और भूमध्य सागर, काला सागर, कैस्पियन सागर और अरब सागर से नमी लेकर आते हैं. ये उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम में समाहित रहते हैं.
यह एक ऊंचाई पर तेज़ चलने वाली हवा है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है और हिमालय व तिब्बत की ऊंची चोटियों के ऊपर स्थित होती है. पश्चिमी विक्षोभ सबसे ज़्यादा दिसंबर से मार्च में देखने को मिलते हैं.
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