आदित्य पंचोली और सलीम खान को ठगने वाला 'नटवरलाल' गिरफ्तार, मजदूर बनकर बेचता था फेक गोल्ड कॉइन

गोल्ड कॉइन की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने एक गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि ये लोग पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाते थे और गरीब मजदूरों का वेश धारण कर उन्हें ठगते थे.

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पुलिस के मुताबिक, प्रभुभाई नाम का आरोपी पिछले 25 सालों से लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है. (Photo: Representational ) पुलिस के मुताबिक, प्रभुभाई नाम का आरोपी पिछले 25 सालों से लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है. (Photo: Representational )

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:03 AM IST

पुलिस ने अंतरराज्यीय गोल्ड कॉइन की धोखाधड़ी मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के दौरान 2 करोड़ रुपये से अधिक नकद और 678 ग्राम सोना बरामद किया गया. आरोपियों में सोलंकी प्रभुभाई गुलशनभाई उर्फ कल्पेश शामिल है, जो वडोदरा, गुजरात का निवासी और गिरोह का कथित लीडर बताया जा रहा है.

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) हितेश यादव ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि "लगभग 15 साल पहले, प्रभुभाई ने बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली से 25 लाख रुपये और सलमान खान के पिता सलीम खान से 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी. धोखाधड़ी से मिले पैसों से प्रभुभाई ने 4 बार शादी की और 'लव यू' नाम की एक गुजराती फिल्म भी बनाई."

इस मामले में अन्य 3 आरोपियों की पहचान पंकज शर्मा (निहाल विहार, दिल्ली), मनीष कमलेश शाह (करेली बाग, वडोदरा) और ईश्वर मारवाड़ी (रामदेव नगर, वडोदरा) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, प्रभुभाई और पंकज शर्मा को गुरुग्राम से पकड़ा गया, जबकि मनीष शाह और ईश्वर मारवाड़ी को गुजरात में गिरफ्तार किया गया.

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पुलिस ने बताया प्रभुभाई पिछले 25 सालों से लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है, और उसने अधिकांश आपराधिक गतिविधियां को मुंबई और गुजरात में अंजाम दिया है. पुलिस ने बताया कि अपराध से मिले पैसों से उसने दिल्ली-मुंबई रोड पर करजन लकोदरा में 'होटल पीएम' खरीदा था.

हितेश यादव ने बताया कि प्रभुभाई गुजरात नगर पार्षद चुनाव में अपनी पत्नी पार्वती सोलंकी के लिए टिकट हासिल करके अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना चाहता था.

यादव ने बताते हैं कि यह गिरोह आमतौर पर पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाता था. गिरोह के अधिकांश सदस्य अशिक्षित हैं और वे गरीब मजदूरों का वेश बनाकर अपने साथ 5-6 असली सोने-चांदी के सिक्के रखते थे. वे अमीर लोगों को ये सिक्के दिखाते हुए कहते थे कि खुदाई के दौरान उन्हें ये मिले हैं.

गिरोह के सदस्य इन सिक्कों के असली होने के सबूत के तौर पर कुछ असली सोने के सिक्के पेश करते थे. जब सोना असली साबित हो जाता और उसकी कीमत 25 से 30 लाख रुपये प्रति किलो आंकी जाती, तो ग्राहक को लालच देने की कोशिशें की जाती थी. डील फाइनल होने के बाद गिरोह के सदस्य असली सोने की जगह सोने की परत चढ़े तांबे के सिक्के दे देते और पैसे लेकर फरार हो जाते थे.

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1 अप्रैल से थी तलाश

NCR में इस गिरोह की तलाश 1 अप्रैल को शुरू की गई थी, जब गुरुग्राम स्थित एक एक्सपोर्टर ने सुशांत लोक पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी. एक्सपोर्टर आरोप लगाया था कि 13 फरवरी को एक अज्ञात व्यक्ति ने उसे सस्ते दामों पर सोने और चांदी के सिक्के बेचने का वादा करके ठग लिया.

पुलिस के मुताबिक, 2 मार्च को उस व्यक्ति ने सुशांत लोक स्थित उसके घर से बड़ी मात्रा में सोने के सिक्के बेचने के बहाने लगभग 2.49 करोड़ रुपये नकद और लगभग 500 ग्राम सोना ले लिया, लेकिन बदले में उसे नकली सिक्के दे दिए.

जांच के दौरान, सेक्टर 43 की क्राइम यूनिट की एक टीम ने गिरोह के रिंगलीडर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया. जानकारी के मुताबिक, प्रभुभाई के खिलाफ महाराष्ट्र में धोखाधड़ी के 2 मामले और गुजरात में 7 मामले दर्ज हैं.

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