छात्रों को धोखा दे रही थी Al-Falah यूनिवर्सिटी, 2018 में खत्म हो गई थी मान्यता और होते रहे एडमिशन

फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर 2018 में समाप्त हो चुकी यूजीसी मान्यता को वेबसाइट पर दिखाकर छात्रों को गुमराह कर दाखिले कराने का आरोप लगा है. इस मामले में विश्वविद्यालय के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी न्यायिक हिरासत में हैं.

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दिल्ली पुलिस के मुताबिक फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता 2018 में ही खत्म हो गई थी. (File Photo: PTI) दिल्ली पुलिस के मुताबिक फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता 2018 में ही खत्म हो गई थी. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • फरीदाबाद ,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:31 AM IST

फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता वर्ष 2018 में समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट और अन्य प्रचार सामग्री से यूजीसी मान्यता हटाए बिना छात्रों को दाखिले के लिए आकर्षित किया. यह जानकारी गुरुवार को दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने दी. यह खुलासा विश्वविद्यालय के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ चल रही जांच के दौरान सामने आया है.

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जवाद अहमद सिद्दीकी को 27 जनवरी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने यूजीसी की शिकायत के आधार पर दर्ज दो एफआईआर में धोखाधड़ी और अन्य संबंधित आरोपों में गिरफ्तार किया था. 31 जनवरी को अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. पुलिस के अनुसार, वर्ष 2018 में मान्यता की अवधि समाप्त होने के बावजूद विश्वविद्यालय खुद को यूजीसी-मान्यता प्राप्त संस्थान के रूप में पेश करता रहा, जिससे कथित तौर पर छात्रों को भ्रमित कर दाखिले कराए गए.

अल फलाह यूनिवर्सिटी उस समय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आई, जब इसके मेडिकल इंस्टीट्यूट से जुड़े तीन डॉक्टरों के नाम 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट मामले में सामने आए थे. आरोप है कि ये डॉक्टर एक आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा थे. संदिग्धों में उमर नबी भी शामिल था, जिस पर लाल किले के पास विस्फोट करने वाली कार चलाने का आरोप है.

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यह भी पढ़ें: अल फलाह यूनिवर्सिटी को अटैच कर सकती है ED, दिल्ली धमाकों से जुड़े हैं तार

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच ने सिद्दीकी से चार दिन की पुलिस हिरासत में पूछताछ की थी, जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा संचालित बीएड और इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों की वैधता और मान्यता को लेकर सवाल किए गए. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी नवंबर में सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था. ईडी ने अदालत को बताया था कि विश्वविद्यालय ने कथित रूप से झूठे दावों के जरिए छात्रों को दाखिले के लिए प्रेरित कर लगभग 45 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय पैदा की.

जनवरी में ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल करते हुए विश्वविद्यालय से जुड़ी 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क की थीं. जांच एजेंसियों का आरोप है कि संस्थान के फंड को परिवार द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के माध्यम से घुमाया गया और सिद्दीकी के परिवार के सदस्यों के पक्ष में विदेशी धनराशि भेजी गई. फिलहाल एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, शैक्षणिक रिकॉर्ड और मान्यता से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं. 

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