22 प्रदेशों में अप्रैल से SIR, चुनाव आयोग ने राज्यों से कहा- तैयारी कीजिए

चुनाव आयोग ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूची के व्यापक संशोधन के लिए SIR की तैयारियां जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं. यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की संभावना है. SIR में नए मतदाताओं को जोड़ना, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और गलतियां सुधारना शामिल है.

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चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर राज्यों को दिया आदेश (Photo: ITG) चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर राज्यों को दिया आदेश (Photo: ITG)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में व्यापक सुधार और संशोधन करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. आयोग ने 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की तैयारियां जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं. 

आयोग ने अपने पत्र में साफ किया है कि यह अगला फेज अप्रैल से शुरू होने की संभावना है, इसलिए सभी संबंधित राज्य प्रशासन से कहा गया है कि वे समय रहते जरूरी इंतजाम कर लें.

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यह निर्देश आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया है.

यह भी पढ़ें: असम दौरे से शुरू हुई चुनाव आयोग की समीक्षा, मतदान के तारीखों की घोषणा जल्द

चुनाव आयोग ने याद दिलाया कि पिछले साल जून में पूरे देश में मतदाता सूची के पैन-इंडिया SIR करने का आदेश दिया गया था. बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह कार्य अभी जारी है. असम में SIR की जगह ‘स्पेशल रिवीजन’ किया गया था, जो 10 फरवरी को पूरा हुआ.

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेटेड बनाना है. इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं को जोड़ना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और सूची में गलतियों को सुधारना शामिल होता है. आयोग का यह सुनिश्चित करना है कि यह काम समय सीमा और व्यवस्थित रूप से पूरा हो, ताकि आने वाले चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू रूप से पूरा हो सके. यह कदम लोकतंत्र की मजबूती और सुचारु चुनाव व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.

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बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के पहले हुए SIR को लेकर जमकर विवाद हुआ था. विपक्षी दलों ने इसे लेकर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए थे. हालांकि, आयोग ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया था.

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