पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच तेज हो गई है. इसी सिलसिले में TMC के वरिष्ठ नेता और पूर्व खाद्य और आपूर्ति मंत्री रथिन घोष पूछताछ के लिए ED के दफ्तर पहुंचे.
ED के अधिकारियों ने रथिन घोष को इस मामले में पूछताछ के लिए पहले भी कई बार समन भेजे थे. हालांकि, वो अब तक जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हो रहे थे. हर बार उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए समन को टाल दिया था.
रथिन घोष आज सुबह 10:36 बजे पूछताछ के लिए ईडी के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स पहुंचे थे. रथींद्र बोस इस साल बिधाननगर सीट से टीएमसी के उम्मीदवार थे, लेकिन वो चुनाव हार गए हैं. अब चुनाव खत्म होने के बाद वे जांच एजेंसी के सामने पेश हुए हैं.
घोष से पहले ईडी ने इसी मामले में 14 मई को कोलकाता पुलिस के DC शांतनु सिन्हा बिस्वास को ED ने गिरफ्तार किया था. वहीं, 11 मई को ईडी ने बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को भी गिरफ्तार किया था.
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के नगरपालिका भर्ती घोटाले की जड़ें शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान सामने आईं. 2023 में जब ईडी ने अयान शील के ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से कई ऐसे दस्तावेज मिले जिनसे पता चला कि धांधली सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं थी.
ये घोटाला राज्य की कई नगरपालिकाओं (जैसे कमरहाटी, दमदम, और हालीशहर) में मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क और ड्राइवर जैसे पदों पर हुई भर्तियों तक फैला हुआ था.
नौकरी दिलाने के लिए OMR शीट में हेराफेरी
जांच में खुलासा हुआ कि अयान शील की कंपनी 'ABS इन्फोजोन' को प्रश्नपत्र छापने और OMR शीट की जांच का ठेका दिया गया था. आरोप है कि अयान शील ने नेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची और पैसों के बदले अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के लिए OMR शीट में हेराफेरी की.
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ईडी ने इस मामले में अयान शील के खिलाफ शिकायत दर्ज की और सुजीत बोस और रथिन घोष जैसे बड़े नेताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी भी की.
तपस सेनगुप्ता / मुनीष पांडे