ED की बड़ी कार्रवाई, अवैध कोयला खनन मामले में 159 करोड़ की संपत्ति जब्त

ईडी ने अवैध कोयला खनन के मामले में बड़ा एक्शन लिया है. ईस्टर्न कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रही अवैध खनन गतिविधियों और चोरी के मामलों में कार्रवाई की गई है.

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Enforcement Directorate Enforcement Directorate

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े मामले में ₹159.51 करोड़ की आपराधिक आय को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है. यह कार्रवाई ईस्टर्न कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रही अवैध खनन गतिविधियों और चोरी की जांच के सिलसिले में की गई है. अवैध खनन गतिविधियां अनूप माजी उर्फ ​​लाला के नेतृत्व वाले एक गिरोह द्वारा की जा रही थीं.

जांच में पता चला है कि यह गिरोह अवैध खनन और बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी में लिप्त था.  बताया जा रहा है कि अवैध रूप से निकाले गए कोयले को स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में पहुंचाया जाता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि अनूप माजी ने एक अवैध ट्रांसपोर्ट चालान या पैड, जिसे आमतौर पर "लाला पैड" के नाम से जाना जाता है, उसका इस्तेमाल शुरू किया था. यह फर्जी चालान गैर-मौजूद कंपनियों के नाम पर टैक्स इनवॉइस की तरह इस्तेमाल किया जाता था.

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नकली चालान के साथ, ट्रांसपोर्टर को 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था. ट्रांसपोर्टर अवैध कोयला ले जा रहे ट्रक, डम्पर या टिपर की नंबर प्लेट के पास नोट को रखकर उसकी तस्वीर खींचता था और कोयला सिंडिकेट के संचालक को भेज देता था.

संचालक फिर उस तस्वीर को व्हाट्सएप के माध्यम से वाहन के मार्ग में स्थित संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को भेजता था, ताकि ट्रक को रोका न जा सके या अगर रोका भी जाए तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाए.

सिंडिकेट के रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब ₹2,742 करोड़ की अवैध कमाई हुई. PMLA जांच के दौरान जब्त रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, टैली डेटा और व्हाट्सऐप चैट के से पता चला है कि इसमें सुनियोजित नकद लेनदेन और हवाला के जरिए पैसे के ट्रांसफर का इस्तेमाल किया गया.

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इस अपराध में कई मल्टीपल लेयर्स और जटिल वित्तीय लेनदेन शामिल हैं, जिन्हें आपराधिक आय को छिपाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था. प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले की व्यवस्थित तरीके से जांच कर रहा है, ताकि उन सभी लोगों को चिन्हित किया जा सके जो इस अपराध में शामिल हैं. 

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