दुनिया में फिर इबोला का खौफ... 90 की मौत के बाद WHO का ग्लोबल अलर्ट, भारत ने एयरपोर्ट पर बढ़ाई निगरानी

अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला का प्रकोप बढ़ने के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. WHO ने कॉन्गो और युगांडा में फैले इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय और NCDC स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और निगरानी बेहद जरूरी है.

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अफ्रीका में बढ़ते इबालो के प्रकोप को लेकर भारत में एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और निगरानी तेज कर दी गई है (File Photo: PTI) अफ्रीका में बढ़ते इबालो के प्रकोप को लेकर भारत में एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और निगरानी तेज कर दी गई है (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

अफ्रीका में इबोला वायरस एक बार फिर से तेजी से फैल रहा है. इतना ज्यादा कि WHO यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन को इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इमरजेंसी घोषित करना पड़ा. 300 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं और करीब 90 लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में अभी कोई मामला नहीं है, लेकिन सरकार और डॉक्टर सतर्क हो गए हैं.

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अफ्रीका के दो देशों, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो यानी डीआरसी और युगांडा में इबोला वायरस तेजी से फैल रहा है. वहां 300 से ज्यादा लोगों में इबोला के लक्षण मिले हैं और करीब 90 लोगों की मौत हो गई है.

इसे देखते हुए WHO ने इसे PHEIC यानी अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. सीधे शब्दों में कहें तो यह दुनिया का सबसे ऊंचा हेल्थ अलर्ट होता है, जो तब जारी होता है जब कोई बीमारी सिर्फ एक देश तक सीमित न रहकर पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकती है.

यह तीसरी बार है जब इबोला की वजह से यह अलर्ट जारी हुआ है. इससे पहले 2014 में वेस्ट अफ्रीका में हुए भयानक इबोला आउटब्रेक में 11,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी. तब भी WHO ने यही अलर्ट जारी किया था. फिर 2019 में DRC में दोबारा यह अलर्ट लगाना पड़ा था.

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भारत को क्यों होनी चाहिए चिंता?

भारत में अभी इबोला का कोई मामला नहीं है. लेकिन दुनिया आज इतनी जुड़ी हुई है कि कोई भी बीमारी किसी भी देश में पहुंच सकती है. हवाई यात्रा से कोई भी वायरस घंटों में एक देश से दूसरे देश पहुंच सकता है.

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भारत में पहले भी एक मामला आ चुका है. नवंबर 2014 में दिल्ली में एक 26 साल के युवक में इबोला पाया गया था, जो लाइबेरिया से लौटा था. उस वक्त सरकार ने तुरंत उसे अलग किया, सभी संपर्कों की जांच की और बीमारी को फैलने से रोक दिया.

AIIMS दिल्ली के कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. संजय राय कहते हैं कि भारत में अभी खतरा कम है, लेकिन लापरवाही नहीं चलेगी. उनका कहना है कि अगर सिर्फ एक भी संक्रमित मरीज किसी भीड़भाड़ वाले अस्पताल में पहुंच गया और पता नहीं चला, तो दिक्कत हो सकती है. इसीलिए एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और डॉक्टरों की जागरूकता बहुत जरूरी है.

भारत क्या कर रहा है?

भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल यानी NCDC इस पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रिव्यू मीटिंग भी की, जिसमें देश की तैयारियों, एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और अगर कोई मामला आए तो क्या करना है, इन सब बातों पर चर्चा हुई.

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मेदांता के डॉ. रणदीप गुलेरिया, जो आंतरिक चिकित्सा और श्वसन के चेयरमैन हैं, कहते हैं कि कोविड-19 के बाद भारत की तैयारी काफी मजबूत हो गई है. देश में अब बेहतर लैब नेटवर्क, बेहतर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और इन्फेक्शन कंट्रोल की ज्यादा जागरूकता है.

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अस्पतालों को अलर्ट रहना होगा. खासकर उन मरीजों के लिए जो विदेश से आए हों और जिन्हें अचानक बुखार या ब्लीडिंग जैसे लक्षण हों.

सरकार ने जो कदम उठाए हैं या उठाने की तैयारी है उनमें अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर कड़ी स्क्रीनिंग, संदिग्ध मरीज को तुरंत अलग करना, डॉक्टरों और नर्सों को पूरी सुरक्षा किट पहनना और हाथ धोने सहित साफ-सफाई का पालन शामिल है.

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WHO ने भी कहा है कि समुदाय को जागरूक करना, मृतकों को सुरक्षित तरीके से दफनाना और समय पर इलाज करना बेहद जरूरी है. और आगे ऐसी महामारियों को रोकने के लिए दुनिया के सभी देशों को मिलकर काम करना होगा.

इनपुट: पीटीआई

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