'भारत के 50% कमर्शियल विमानों में तकनीकी गड़बड़ी', संसदीय पैनल की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

विमानन क्षेत्र की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था की कमजोरी उजागर हुई. बड़ी संख्या में उड़ानों में खामियां मिलने से सुरक्षा मानकों पर सवाल उठे हैं. नियामक संस्थान में कर्मचारियों की कमी भी चुनौती बनी हुई है.

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एअर इंडिया के 166 में से 137 विमानों में पाई गईं खामियां (File Photo- ITG) एअर इंडिया के 166 में से 137 विमानों में पाई गईं खामियां (File Photo- ITG)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST

संसद की स्थायी समिति की हालिया रिपोर्ट ने देश के नागर विमानन क्षेत्र में एक डरावनी तस्वीर पेश की है.रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच ऑडिट किए गए कुल 754 विमानों में से 377 (करीब 50%) में बार-बार होने वाली तकनीकी खामियां पाई गई हैं.

भारत के नागर विमानन क्षेत्र को लेकर संसद की एक अहम समिति की रिपोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा किए गए ऑडिट में सामने आया है कि देश के करीब 50% कमर्शियल विमानों में बार-बार तकनीकी खराबियां सामने आई हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच कुल 754 विमानों का ऑडिट किया गया, जिनमें से 377 विमान ऐसे पाए गए जिनमें लगातार तकनीकी खामियां आ रही थीं. संसद की स्थायी समिति ने इसे गंभीर सुरक्षा जोखिम बताया है और भारत की एविएशन सेफ्टी व्यवस्था में 'फंडामेंटल रीसेट' की जरूरत जताई है.

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि इन खामियों का बड़ा हिस्सा एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस से जुड़ा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, एअर इंडिया के 166 विमानों में से 137 में बार-बार तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, जबकि एअर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 में लगातार समस्याएं दर्ज की गईं.

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अहमदाबाद विमान हादसे के बाद जुलाई 2025 में डीजीसीए द्वारा एअर इंडिया का व्यापक ऑडिट किया गया था, जिसमें करीब 100 से ज्यादा सुरक्षा चूकें सामने आईं. इनमें सात लेवल-1 उल्लंघन शामिल थे, जिन्हें तुरंत ठीक करने की जरूरत बताई गई. इसके अलावा बोईंग 787 और 777 विमानों के पायलटों की ट्रेनिंग में कमी, कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में पर्याप्त केबिन क्रू की कमी, और फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट का उल्लंघन जैसे गंभीर मामले भी सामने आए.

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि DGCA ने एअर इंडिया को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए नौ कारण बताओ नोटिस जारी किए. वहीं, 2025 के अंत तक विभिन्न एयरलाइंस को कुल 19 नोटिस जारी किए गए, जिनमें फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट उल्लंघन, क्वालिटी चेक में कमी, बिना अनुमति कॉकपिट एक्सेस और एक्सपायर्ड इमरजेंसी उपकरणों के साथ उड़ान संचालन जैसे मामले शामिल हैं.

फरवरी 2026 में DGCA ने एयर इंडिया पर करीब 1 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया, जब पाया गया कि एयरलाइन ने नवंबर 2025 में एक Airbus A320 विमान को बिना वैध 'एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट' के आठ उड़ानों में संचालित किया.

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संसदीय समिति ने नियामक संस्था DGCA की क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, DGCA में लगभग 48.3% पद खाली हैं, जिससे तेजी से बढ़ते विमान बेड़े की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है. समिति ने कहा कि इतनी बड़ी कमी के चलते प्रभावी निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है. इस रिपोर्ट के बाद भारत के एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और नियामकीय ढांचे को लेकर व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है.

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