सीबीआई NEET-UG 2026 पेपर लीक केस की जांच में जुटी है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है. हर बार एक नई रहस्यमय परत सामने आ रही है. इस मामले में CBI ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क NTA से लेकर बड़े कोचिंग संस्थानों तक फैला हुआ था.
CBI ने महाराष्ट्र के लातूर से RCC यानी रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है. उसके मोबाइल फोन से NEET के लीक प्रश्नपत्र बरामद हुए हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य था, जो प्रश्नपत्र लीक करता था.
पेपर लीक के कितने गुनाहगार?
इससे पहले सीबीआई ने जांच में पेपर लीक का मास्टरमाइंड पी.वी. कुलकर्णी को माना है और और ये नेटवर्क बायोलॉजी की सीनियर टीचर मनीषा गुरुनाथ मांधरे, ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे, शुभम खैरनार, एक छात्र यश यादव और धनंजय लोखंडे से होकर बिंवाल परिवार तक जाता है. इसमें मांगीलाल बिंवाल, दिनेश बिंवाल और विकास बिंवाल शामिल है.
इस पूरे नेटवर्क की पहली कड़ी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर हैं. इसके बाद सीबीआई की जांच सबसे अहम पहलू की ओर मुड़ गई है, जहां उसका शक किसी एनटीए स्टाफ के ऊपर ही है, क्योंकि बिना NTA स्टाफ के मिलीभगत के ये लीक संभव नहीं हो सकता है, सीबीआई ऐसा मान रही है.
उधर, सीबीआई इन सभी से पूछताछ कर रही है. NTA के नीट पेपर लीक मामले में इन सभी की क्या-क्या भूमिका थी, इन सब पर डालते हैं एक नजर-
शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर
सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से RCC रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है. मोटेगांवकर के फोन से NEET के पेपर बरामद हुए हैं. अभी तक मोटेगांवकर पहली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने लीक पेपर को नेटवर्क को फैलाया. सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने शिवराज मोटेगांवकर से 8 से 10 घंटे तक लंबी पूछताछ की है. इसमें NTA से जुड़े कई अधिकारियों के साथ संपर्कों और पेपर लीक के मास्टरमाइंड पी.वी. कुलकर्णी से रिश्तों को लेकर सवाल पूछे गए हैं.
पीवी कुलकर्णी (केमेस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर)
पेपर लीक मामले में दूसरा नाम पीवी कुलकर्णी का है. CBI का दावा है कि केमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी उस एक्सपर्ट टीम का हिस्सा थे जो प्रश्नपत्र को तैयार करने की प्रक्रिया करते थे. यानी पेपर लीक मामले में सीधे तौर पर पेपर तैयार करने वालों की ही भूमिका नजर आ रही है.
मनीषा गुरुनाथ मांधरे (बॉयोलॉजी टीचर)
सीबीआई ने इस मामले में बायोलॉजी की सीनियर टीचर मनीषा गुरुनाथ मांधरे को भी गिरफ्तार किया है. मनीषा मांधरे भी पेपर तैयार करने वाली एक्सपर्ट टीम में शामिल थीं. इन्होंने ही एनटीए से प्रश्नपत्र चुराए थे. केमेस्ट्री और बॉयोलॉजी के प्रश्न लीक होने के बाद सवाल है कि फिजिक्स का एक्सपर्ट कौन था क्योंकि फिजिक्स के भी कुछ सवाल लीक होने के संकेत मिले हैं. इस मामले में एक और संदिग्ध की पहचान की गई है. हालांकि सीबीआई ने अभी उसका खुलासा नहीं किया है.
विवेक पाटिल (छात्र, जिसे शिवराज मोटेगांवकर ने लीक पेपर की कॉपी दी)
सामने आया था कि NEET परीक्षा में इस्तेमाल किए गए प्रश्नपत्र और रिजर्व सेट के बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सवाल एक ही क्वेश्चन बैंक से मेल खाते हैं. यही क्वेश्चन बैंक CBI जांच का बड़ा आधार बना है. केंद्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, शिवराज मोटेगांवकर ने लीक प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी विवेक पाटिल समेत कई लोगों को उपलब्ध कराई थी. एजेंसी को आरोपी के मोबाइल फोन में लीक प्रश्नपत्रों का वीडियो भी मिला है.
जांच एजेंसी को मोटेगांवकर के कोचिंग इंस्टीट्यूट और उसके घर पर तलाशी में केमिस्ट्री का क्वेश्चन बैंक मिला. इसमें ठीक वही सवाल मौजूद थे, जो 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा में पूछे गए थे. इस बरामदगी को जांच में बेहद अहम माना जा रहा है. एजेंसी ने बताया कि पिछले 24 घंटों में देश के अलग-अलग हिस्सों में 5 जगहों पर छापेमारी की गई. इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं.इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है.
मनीषा वाघमारे (पुणे की ब्यूटीशियन)
NEET पेपर लीक की जुड़ती कड़ियों में एक नाम मनीषा वाघमारे का भी है. CBI जांच में सामने आया है कि पेपर लीक केस में पुणे से अरेस्ट ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे किसी NTA अफसर या स्टाफ से सीधे संपर्क में थी. मनीषा पुणे में मेडिकल उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग और एडमिशन कंसल्टेंसी भी चलाती हैं.
दिलचस्प बात यह है कि वाघमारे के पति भी पेशे से डेंटिस्ट हैं और पुणे में ही अपना क्लिनिक चलाते हैं. वाघमारे के खातों में हुए बैंकिंग लेनदेन भी संदिग्ध हैं क्योंकि कई खाताधारकों ने NEET परीक्षा से पहले और बाद में उनके खातों में लगभग 20 लाख रुपये भेजे हैं. सूत्रों के अनुसार, वाघमारे के खातों में पैसे भेजने वाले खाते ज्यादातर अन्य राज्यों के हैं और कुछ इसी राज्य के भी हैं.
शुभम खैरनार (BAMS स्टूडेंट, जिसने पेपर बेचने के नेटवर्क का हिस्सा)
उधर सीबीआई का मानना है कि ये एक ऐसा नेटवर्क भी हो सकता है जो मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग और कंसल्टेंसी के जरिए सक्रिय है. मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर काम करने वाले कुछ लोगों का संबंध कथित तौर पर पेपर लीक जुड़ा हो सकता है. इसी कड़ी में BAMS थर्ड ईयर का एक छात्र शुभम खैरनार भी गिरफ्तार किया गया है. वह मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग से जुड़े काम में एक्टिव था.
यश यादव (जिसने शुभम खैरनार से लीक पेपर लिया)
शुभम खैरनार, ने कथित तौर पर गुरुग्राम में यश यादव को पेपर दिया था. यादव ने इसे आगे राजस्थान के मांगीलाल बिंवाल को दिया, जिसने अपने बेटे विंकास बिवाल और भतीजों के लिए पेपर खरीदा था. बिंवाल परिवार ने पेपर को अन्य इच्छुक छात्रों और यहां तक कि कुछ शिक्षकों को पैसे के बदले में ये पेपर दे दिया था. शुभम खैरनार की पहचान बीएएमएस स्टूडेंट की बताई जाती रही है, लेकिन इंडिया टुडे टीवी ने खुलासा किया कि शुभम खैरनार किसी भी तरह की मेडिकल प्रैक्टिस या इंटर्नशिप नहीं कर रहा था, बल्कि वह मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग और कंसल्टेंसी का कारोबार चला रहा था.
क्या था शुभम खैरनार का 'असली काम'?
शुभम नासिक में एसआर एजुकेशन कंसल्टेंसी नाम से कार्यालय चलाता था और मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के इच्छुक छात्रों को आश्वस्त करता था. खैरनार नासिक के कनाडा कॉर्नर इलाके के व्यावसायिक जिले में स्थित एक हाई-प्रोफाइल कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से अपना काम कर रहा था. इस कंसल्टेंसी की भोपाल, अकोला, पुणे और कई अन्य शहरों में भी शाखाएं थीं.
सूत्रों के अनुसार, संस्था में उम्मीदवारों को देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का आश्वासन दिया जाता था और साथ ही उन्हें NEET परीक्षा की तैयारी के लिए गाइडेंस और सहायता भी दी जाती थी. सूत्रों का कहना है कि काउंसलर राज्य भर के उन कोचिंग संस्थानों के साथ भी लगातार संपर्क में थे जो छात्रों को NEET परीक्षा में बैठने के लिए तैयार कर रहे थे.
धनंजय लोखंडे (जिसने खैरनार तक गेस पेपर पहुंचाया)
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से गिरफ्तार आरोपी आरोपी धनंजय लोखंडे शुभम खैरनार के लगातार संपर्क में था. उसे ही NEET के गेस पेपर का सोर्स माना जा रहा है, जिसने खैरनार को प्रश्नपत्र मुहैया कराया था. सूत्रों के अनुसार, लोखंडे की ट्रैवल हिस्ट्री से पता चलता है कि वह कई बार मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों की यात्रा कर चुका है. मामला सामने आने के बाद लोखंडे पुणे स्थित अपने ठिकाने से भागकर अपने पैतृक गांव अहिल्यानगर लौट आया था.
खैरनार की गिरफ्तारी के बाद वह अपने गांव से निकल गया और रास्ते में ही स्थानीय अपराध शाखा (LCB) के अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया. CBI ने लोखंडे को हिरासत में रखने के लिए LCB से संपर्क किया था. सूत्रों के मुताबिक, लोखंडे का भाई अहिल्यानगर जिले के राहुरी तालुका में डॉक्टर है और एक समय लोखंडे भी मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता था. इसी दौरान वह कई अन्य काउंसलरों और मेडिकल प्रवेश परामर्श से जुड़े लोगों के संपर्क में आया.
धनंजय लोखंडे, ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे से भी संपर्क में था. वाघमारे और लोखंडे के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वे 3 मई को हुई NEET परीक्षा से पहले और बाद में लगातार संपर्क में थे. ये उस दौरान भी संपर्क में थे जब खैरनार ने यश यादव को गेस पेपर दिया था. इनके कनेक्शन तब भी सामने आए हैं जब लीक पेपर को राजस्थान में बिंवाल परिवार के सदस्यों के साथ साझा किया गया था.
मनीषा वाघमारे की अकाउंट हिस्ट्री संदिग्ध
ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे की अकाउंट हिस्ट्री भी अपने आप में जांच का विषय है. ऐसे लगभग 21 खाते हैं जिन्होंने वाघमारे के खातों में पैसे भेजे हैं. वाघमारे और लोखंडे के बीच कई बार फोन और मैसेज हुए हैं. जिनमें से कई मैसेज डिलीट कर दिए गए हैं. हालांकि, सीबीआई टीम ने उनका मोबाइल फोन और अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन डेटा रिकवरी के लिए भेज दिए हैं. शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि मेडिकल एडमिशन काउंसलरों का गिरोह किसी ऐसे सिंडिकेट की मदद से यह रैकेट चला रहा था जो NEET पेपर लीक में शामिल था.
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