केंद्र सरकार ने प्रवीण सूद को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उनके कार्यकाल में एक साल का विस्तार कर दिया है. इस संबंध में केंद्र सरकार की मंत्रिमंडलीय नियुक्ति समिति ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही वह अब अगले एक साल तक CBI के निदेशक पद पर बने रहेंगे.
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रवीण सूद का नया कार्यकाल 24 मई 2026 के बाद प्रभावी होगा. यह फैसला चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है. इस संबंध में 13 मई 2026 को आधिकारिक आदेश जारी किया गया. यह अधिसूचना कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी की गई है.
आदेश में कहा गया है कि भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी प्रवीण सूद को CBI के निदेशक के रूप में एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया है. मंत्रिमंडलीय नियुक्ति समिति ने इस विस्तार को अपनी स्वीकृति दी.
केंद्र सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब सीबीआई कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर रहा है. ऐसे में प्रवीण सूद का कार्यकाल बढ़ाए जाने को संस्था में निरंतरता बनाए रखने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
प्रवीण सूद भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं और वर्तमान में देश की प्रमुख जांच एजेंसी का नेतृत्व कर रहे हैं. उनके कार्यकाल विस्तार को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है.
राहुल गांधी ने चयन पर जताई थी आपत्ति
बता दें कि CBI के अगले निदेशक की नियुक्ति को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास '7 लोक कल्याण मार्ग' पर उच्चस्तरीय चयन समिति की अहम बैठक आयोजित की गई. इस समिति में प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नए सीबीआई प्रमुख के नामों पर विस्तार से चर्चा की.
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया को लेकर असहमति व्यक्त की. बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने अपना असहमति पत्र भी सौंपा. बाद में उन्होंने 'X' पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. राहुल गांधी ने कहा कि वह किसी ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते जिसे वह निष्पक्ष नहीं मानते और विपक्ष का नेता केवल औपचारिक सहमति देने वाला पद नहीं है.
जितेंद्र बहादुर सिंह