बीजेपी संगठन और केंद्रीय कैबिनेट में बड़े बदलावों की अटकलें तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी नई टीम का ऐलान कब करते हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं.
दरअसल, 9 जून को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी संगठन और मोदी सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. अगर पिछले कार्यकालों पर नजर डालें तो प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में सरकार बनने के करीब छह महीने बाद नवंबर 2014 में पहला मंत्रिमंडल विस्तार किया था.
इसके बाद जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में भी फेरबदल और विस्तार हुए थे, जिनमें कई मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां दी गई थीं. वहीं दूसरे कार्यकाल में जुलाई 2021 में बड़ा मंत्रिमंडलीय विस्तार हुआ था और मई 2023 में विभागों में बदलाव किए गए थे. इसी अनुभव के आधार पर अब यह माना जा रहा है कि तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार फिर से मंत्रिपरिषद में बदलाव कर सकती है. फिलहाल केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 72 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक रूप से इसकी अधिकतम संख्या 81 तक हो सकती है.
सरकार में नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा
ऐसे में कुछ नए चेहरों को मौका मिलने और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक 2027 में होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर सकती है. माना जा रहा है कि चुनावी राज्यों से कुछ नए नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, ताकि राजनीतिक संदेश भी दिया जा सके.
बीजेपी संगठन में भी बदलाव की तैयारियां तेज हैं. 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही नितिन नवीन संगठनात्मक ढांचे को नया स्वरूप देने में जुटे हुए हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर व्यापक स्तर पर मंथन लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही नई टीम की घोषणा की जा सकती है. बताया जा रहा है कि नई टीम में युवा नेताओं को प्राथमिकता मिल सकती है. खासतौर पर 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां दिए जाने की चर्चा है.
बीजेपी संगठन में भी दिख सकते हैं नए चेहरे
हालांकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए अनुभवी नेताओं को भी अहम भूमिकाएं दी जा सकती हैं. सूत्रों के अनुसार बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव स्तर पर भी कई नए चेहरे सामने आ सकते हैं. पार्टी की रणनीति अलग-अलग राज्यों से नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर आगे लाने की है, ताकि भविष्य के लिए नई पीढ़ी का नेतृत्व तैयार किया जा सके. इसके अलावा महिला नेताओं को भी संगठन में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है.
पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि जिस तरह नितिन नवीन के चयन से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी नेतृत्व के बीच लंबा विचार-विमर्श हुआ था, उसी तरह उनकी टीम के गठन को लेकर भी गंभीर मंथन किया गया है. संघ की प्राथमिकता ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे लाने की बताई जा रही है, जो संगठन और विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित हों और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहते हों. बीजेपी संगठन और केंद्र सरकार में होने वाले संभावित बदलाव पार्टी की भविष्य की चुनावी रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
हिमांशु मिश्रा