असम के नगांव में आठ साल पुराने मॉब लिंचिंग केस में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. नगांव की एक अदालत ने सोमवार को दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में 45 आरोपियों में से 20 को दोषी ठहराया, जबकि 25 अन्य को बरी कर दिया. जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीजे महंता ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया.
इन धाराओं में भीड़ द्वारा हत्या, दंगा, सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य पालन से रोकना और जानबूझकर चोट पहुंचाना शामिल है. अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष 25 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा. ये सभी लोग इसी मामले में गिरफ्तार किए गए थे और फिलहाल जेल में बंद थे. आरोपियों को सजा 24 अप्रैल को सुनाई जाएगी.
न्यायाधीश ने नगांव केंद्रीय जेल के अधीक्षक को बरी किए गए लोगों को रिहा करने का निर्देश दिया. दोषियों और उनके वकीलों को सजा सुनाए जाने के दिन अदालत में मौजूद रहने को कहा गया है. इस मामले में कुल 48 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से 3 आरोपी नाबालिग थे, जिनका मामला अलग से चल रहा है. वे फिलहाल जोरहाट के किशोर सुधार गृह में हैं.
दरअसल, 29 वर्षीय नीलोत्पल दास और 30 वर्षीय अभिजीत नाथ करबी आंगलोंग के दोकमोका थाना क्षेत्र के कांगथिलांगसो पिकनिक स्पॉट घूमने गए थे. 8 जून 2018 को लौटते वक्त पंजुरी इलाके में गुस्साए ग्रामीणों की भीड़ ने उनकी गाड़ी रोक ली. भीड़ ने उनको गाड़ी से बाहर खींच लिया. बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी. ये हमला बच्चा चोरी के शक में किया गया था.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दोनों युवक बार-बार यह कहते नजर आए कि वे बच्चा चोर नहीं हैं, बल्कि असम के ही रहने वाले हैं. उन दोनों ने ये भी बताया कि वे घूमने आए थे. इसके बावजूद भीड़ नहीं रुकी. नीलोत्वपल दास मुंबई में साउंड इंजीनियर के तौर पर काम करते थे. वो छुट्टियों में असम आए हुए थे. उनके दोस्त अभिजीत नाथ एक व्यवसायी थे.
वे दोनों लोग प्रकृति की आवाज रिकॉर्ड करने और दर्शनीय स्थलों को देखने निकले थे. मॉब लिंचिंग के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने उनको तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. अदालत में दोनों मृतकों के पिता गोपाल चंद्र दास और अजीत कुमार नाथ मौजूद थे. उन्होंने फैसले पर आंशिक असंतोष जताया है.
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