'वामपंथी विचारधारा की उपज है नक्सलवाद', बोले अमित शाह, कांग्रेस को भी घेरा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि देश में नक्सलवाद अब आखिरी सांसें ले रहा है. उन्होंने दावा​ किया कि छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र लाल आतंक से लगभग मुक्त हो चुका है. शाह ने नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को इसका श्रेय देते हुए कांग्रेस पर आदिवासी क्षेत्रों को विकास से वंचित रखने का आरोप लगाया.

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अमित शाह ने कांग्रेस पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास से वंचित रखने का आरोप लगाया. (Photo: PTI) अमित शाह ने कांग्रेस पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास से वंचित रखने का आरोप लगाया. (Photo: PTI)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:13 PM IST

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत में नक्सलवाद अब आखिरी सांसें ले रहा है और दावा किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को लाल आतंक (नक्सलवाद) से लगभग मुक्त करा दिया है. अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासियों तक विकास और कल्याण योजनाओं का लाभ क्यों नहीं पहुंचाया. 

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केंद्रीय गृह मंत्री ने वामपंथी विचारधारा को नक्सलवाद का जन्मदाता बताया. उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) का विकास से कोई लेना देना नहीं है और और यह विचारधारा केवल हिंसा और अव्यवस्था को बढ़ावा देती है. सरकार ने इसे जड़ से खत्म करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र को कभी 'रेड कॉरिडोर' के नाम से जाना जाता था- जिसमें 12 राज्य, देश का 70% भूभाग और करीब 30 करोड़ की आबादी शामिल थी. केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा- वहां के आदिवासी भाई-बहनों की ओर से इस विषय पर चर्चा की अनुमति देने के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं. 

बस्तर में लाल आतंक करीब समाप्त

उन्होंने कहा कि वर्षों से इन क्षेत्रों के लोग चाहते थे कि उनकी पीड़ा, समस्याएं और नक्सलियों द्वारा किए गए अत्याचारों पर विस्तार से चर्चा हो. अमित शाह ने कहा कि कुछ लोग यह दुष्प्रचार करते रहे हैं कि वे न्याय और विकास के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि बस्तर में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है. उन्होंने बताया कि बस्तर में हर गांव तक विकास पहुंचाने के लिए अभियान चलाए गए. स्कूल बनाए गए, राशन की दुकानें खोली गईं, पंचायत और तहसील स्तर पर अस्पताल स्थापित किए गए, लोगों के आधार और राशन कार्ड बनाए गए और उन्हें मुफ्त अनाज भी उपलब्ध कराया जा रहा है. साथ ही गैस कनेक्शन भी वितरित किए जा रहे हैं.

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जो गोली चलाएंगे, कीमत भी चुकाएंगे

अमित शाह ने सवाल उठाया कि जो लोग नक्सलवाद की वकालत करते हैं, उन्होंने 1970 से अब तक इसे खत्म करने के लिए क्या किया. उन्होंने कहा कि हथियारबंद आंदोलन का समर्थन करने वाले लोग संविधान को नहीं मानते और पूरी व्यवस्था को नकारते हैं, लेकिन देश में ऐसा नहीं चल सकता. केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब समय बदल चुका है और नरेंद्र मोदी की सरकार में जो भी हथियार उठाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. जो गोली चलाएंगे, इसकी कीमत भी चुकाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार सभी समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए तैयार है, लेकिन कुछ लोग अपनी विचारधारा के चलते विकास कार्यों को लागू नहीं होने देना चाहते.

सुरक्षा बलों को नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि रेड कॉरिडोर में एक समय कानून का शासन समाप्त हो गया था, जिससे करोड़ों लोग प्रभावित हुए और हजारों युवाओं की जान गई. एक एनजीओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि करीब 20,000 युवाओं की मौत हुई. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद मुक्त शासन की स्थापना वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हो रही है और इसका श्रेय सुरक्षा बलों- CAPF, कोबरा बटालियन, राज्य पुलिस, विशेषकर छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों को जाता है. अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों और मारे गए युवाओं को सदन की ओर से श्रद्धांजलि भी दी.

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