हवाई यात्रा नेताओं के लिए सुविधा और समय की बचत का जरिया है लेकिन कभी-कभी ये जिंदगी और मौत के बीच का फासला भी बन जाती है. इतिहास गवाह है कि कई बड़े नेताओं की जान हवाई हादसों में बची है. आइए जानते हैं उन नेताओं के नाम जिनकी प्लेन हादसों में जान बची है.
जब बाल-बाल बचे थे पूर्व पीएम
ये बात साल 1977 की है जब पूर्व प्रधानमंत्री अपने दौर पर थे. उस दौरान उनका विमान असम में क्रैश हुआ. इस हादसे में मोरारजी देसाई तो बाल-बाल बच गए लेकिन उस समय अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पी.के. थुंगोन बुरी तरह घायल हुए, उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर और अन्य चोटें आईं.
इन बड़े नेताओं की भी बची जान
साल 2001 में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बच निकले जब उनका हेलीकॉप्टर चुरू जिले में एक पेड़ से टकराया.
2004 में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चवन और कुमारी सेल्जा गुजरात में हेलीकॉप्टर हादसे से चमत्कारी ढंग से बचे.
2007 में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके कैबिनेट सहयोगी पी.एस. बाजवा बच निकले जब उनका हेलीकॉप्टर गुरदासपुर में विद्युत तारों में उलझ गया.
30 अगस्त 2009 को पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल बच निकले जब उनका चार्टर्ड हेलीकॉप्टर फिरोजपुर में इमरजेंसी लैंडिंग करने के दौरान सुरक्षित रहा.
2010 में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नक़वी रामपुर (उत्तर प्रदेश) जा रहे थे, जब उनका हेलीकॉप्टर सूखी घास के ढेर के पास उतर गया और आग लग गई, लेकिन पायलट ने तुरंत उड़ान भरी और सुरक्षित जगह लैंड किया.
9 मई 2012 को झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा बच निकले जब उनका हेलीकॉप्टर रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर क्रैश-लैंड हुआ. हादसे में उनके साथ पांच अन्य लोग, जिनमें उनकी पत्नी मीरा मुंडा भी थीं, चमत्कारिक रूप से बच गए. मुंडा को कंधे और एड़ी में चोटें आईं, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर और खतरे से बाहर थी.
8 साल पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस भी हो चुके हैं हादसे के शिकार
25 मई 2017 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी चमत्कारी ढंग से बाल-बाल बच गए. उनका अमेरिकी निर्मित सिकॉर्स्की हेलीकॉप्टर लगभग 80 फीट की ऊंचाई से लतूर जिले के नीलंगा हेलिपैड पर क्रैश-लैंड हुआ था. उस हादसे में फडणवीस और उनके तीन अधिकारी, पायलट और को-पायलट लगभग बिना किसी गंभीर चोट के सुरक्षित रहे.
ये घटनाएं दिखाती हैं कि हवाई यात्रा में हमेशा जोखिम मौजूद होता है, और कभी-कभी यह नेता के जीवन के लिए सच्चे अर्थ में खतरे की घंटी साबित होती है. इन हादसों से सीख यह मिलती है कि सुरक्षा मानक और प्रशिक्षण पर हमेशा विशेष ध्यान देना चाहिए.
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