754 विमानों की जांच, 50% में खामियां... लिस्ट में टॉप पर एअर इंडिया और इंडिगो

लोकसभा में पेश किए गए डेटा के मुताबिक तकनीकी जांच में भारतीय एयरलाइंस के 754 विमानों में से 377 में बार-बार खराबी मिली. इसमें सबसे ज्यादा विमान इंडिगो और एअर इंडिया समूह से संबंधित थे.

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754 विमानों में से 377 में खामियां पाई गईं. (Photo: Pexels) 754 विमानों में से 377 में खामियां पाई गईं. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:25 AM IST

भारतीय एयरलाइंस में तकनीकी खामियों के लिए जांचे गए करीब आधे विमानों में बार-बार खराबी पाई गई है, जिसमें एअर इंडिया ग्रुप और इंडिगो का सबसे बड़ा हिस्सा है. गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए डेटा में यह जानकारी सामने आई है. सरकार ने बताया कि पिछले साल जनवरी से छह शेड्यूल्ड एयरलाइंस के 754 विमानों में बार-बार आने वाली खराबी का विश्लेषण किया गया. इनमें से 377 विमानों में बार-बार खराबी पाई गईं.

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इंडिगो के सबसे ज़्यादा विमानों की समीक्षा की गई. नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन को लिखित जवाब में बताया कि 3 फरवरी तक इंडिगो के 405 विमानों की जांच की गई और 148 में बार-बार खराबी पाई गई.

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के 267 एयरक्राफ्ट की जांच की गई, जिनमें से 191 में बार-बार आने वाली खामियां पाई गईं, जो ऑडिट किए गए फ्लीट का लगभग 72 फीसदी है. डेटा से पता चला कि एअर इंडिया के 166 एयरक्राफ्ट में से 137 में बार-बार खराबी आ रही थी, जबकि एअर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 में भी इसी तरह की समस्याएं पाई गईं.

स्पाइसजेट, अकासा भी शामिल...

इस लिस्ट में दूसरे कैरियर भी शामिल थे. स्पाइसजेट के 43 एयरक्राफ्ट का एनालिसिस किया गया, जिनमें से 16 में बार-बार खराबी पाई गई, जबकि अकासा एयर के 32 विमानों में से 14 में समस्याएं पाई गईं.

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इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन ने सावधानी बरतते हुए अपने पूरे फ्लीट में बड़े पैमाने पर जांच की थी, जिससे ऑब्जर्वेशन की संख्या बढ़ गई.

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, प्रवक्ता ने कहा, "हमने बहुत ज़्यादा सावधानी बरतते हुए अपने पूरे फ्लीट में चेकिंग की है. इसलिए, संख्या ज़्यादा है."

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'सेफ्टी से जुड़ी नहीं हैं दिक्कतें...'

एअर इंडिया के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव ने कहा कि ये फाइंडिंग्स ज़्यादातर कम प्रायोरिटी वाले इक्विपमेंट से जुड़ी हैं. एयरक्राफ्ट सिस्टम को अर्जेंसी के आधार पर कैटेगरी A से D में बांटा गया है, जिसमें एयर इंडिया की ज़्यादातर दिक्कतें कैटेगरी D में आती हैं.

एग्जीक्यूटिव ने कहा, "एअर इंडिया के मामले में, ज़्यादातर दिक्कतें कैटेगरी D में हैं, जिसमें सीटें, ट्रे टेबल, स्क्रीन (सीटों के पीछे) वगैरह शामिल हैं. ये एयरक्राफ्ट की सेफ्टी से संबंधित नहीं हैं."

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एयरलाइन ऑडिट के साथ-साथ, एविएशन रेगुलेटर DGCA ने पिछले साल सर्विलांस एक्टिविटी बढ़ा दी थी. प्रवक्ता ने कहा कि रेगुलेटर ने प्लान्ड मॉनिटरिंग के तहत 3,890 सर्विलांस इंस्पेक्शन, 56 रेगुलेटरी ऑडिट, 84 विदेशी एयरक्राफ्ट (SOFA) चेक और 492 रैंप इंस्पेक्शन किए. 

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इसके अलावा, DGCA ने अनप्लांड सर्विलांस के तहत 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट इंस्पेक्शन किए.

मैनपावर के बारे में, मंत्री ने कहा कि 2022 में DGCA में 637 स्वीकृत टेक्निकल पद थे. स्टाफिंग की कमी को दूर करने के लिए रीस्ट्रक्चरिंग की गई है और स्वीकृत टेक्निकल पदों की संख्या बढ़ाकर 1,063 कर दी गई है.

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