जोशीमठ के बाद अब जम्मू कश्मीर के डोडा में घरों में पड़ी दरारें, पड़ोसी-रिश्तेदारों के घरों में शिफ्ट हुए लोग

डोडा के ठठरी में नई बस्ती इलाके में स्थित 7 घरों में दरारें पड़ी हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि दिसंबर में एक घर में दरार पड़ी थी. लेकिन अब 7 घरों में दरारें पड़ गई हैं. पिछले कुछ दिनों से दरारें चौड़ी हो रही हैं. इन घरों में रहने वाले लोग पड़ोसी या अपने रिश्तेदारों के घरों में पहुंच गए हैं.

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जम्मू कश्मीर के डोडा में घरों में पड़ी दरारें जम्मू कश्मीर के डोडा में घरों में पड़ी दरारें

सुनील जी भट्ट

  • जम्मू,
  • 03 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

उत्तराखंड के जोशीमठ के बाद अब जम्मू कश्मीर के डोडा में भूधंसाव की खबरें सामने आ रही हैं. यहां 7 घरों में दरारें पड़ी हैं. दरारों के चलते लोग दहशत में आ गए हैं. डोडा प्रशासन का कहना है कि पिछले 4 दिन में दरारें चौड़ी हुई हैं. प्रशासन जांच में जुट गया है. हालांकि, अभी भूधंसाव की वजह का पता नहीं चल पाया है. 

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स्थानीय लोगों ने बताया कि दिसंबर में एक घर में दरार पड़ी थी. लेकिन अब 7 घरों में दरारें पड़ गई हैं. पिछले कुछ दिनों से दरारें चौड़ी हो रही हैं. एसडीएम डोडा अतहर अमीन जरगर ने बताया कि इस क्षेत्र में धीरे-धीरे धंसाव हो रहा है. सरकार भूधंसाव के कारण का पता लगाने में जुटी है. जल्द से जल्द इसका समाधान खोजा जाएगा. 

जम्मू कश्मीर के सरकार के सूत्रों ने आजतक से 7 घरों में दरारें पड़ने की पुष्टि की है. बताया जा रहा है कि डोडा के ठठरी में नई बस्ती इलाके में स्थित इन घरों में दरारें पड़ी हैं. इन घरों में रहने वाले लोग पड़ोसी या अपने रिश्तेदारों के घरों में पहुंच गए हैं. भूवैज्ञानिकों की टीम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया है. हालांकि, चिंता की कोई बात नहीं है. 

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जोशीमठ में पड़ी दरारें

इससे पहले उत्तराखंड के जोशीमठ में सैकड़ों घरों में दरारें पड़ी थीं. जोशीमठ को बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब का मुख्य द्वार माना जाता है. यहां अक्टूबर 2021 से मकानों में दरारें आने का सिलसिला शुरू हुआ था. लेकिन पिछले साल दिसंबर के बाद स्थिति काफी तेजी से बिगड़ी. अब तक यहां 863 घरों में दरारें आ चुकी हैं. जोशीमठ में कुल 4500 घर हैं. इनमें से 181 इमारतों को असुरक्षित घोषित किया गया है. जोशीमठ में लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है. परिवारों को अस्थाई तौर पर शिफ्ट किया जा रहा है. इतना ही नहीं प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद भी दी जा रही है. देशभर की तमाम एजेंसियां भूधंसाव की वजह का पता लगाने की कोशिश में जुटी हैं. हालांकि, स्थानीय लोगों ने इसके पीछे एनटीपीसी के प्लांट को जिम्मेदार ठहराया है. 

 

 

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