अबू सलेम फिर फरार हो सकता है! पैरोल पर महाराष्ट्र सरकार का हाईकोर्ट में सख्त ऐतराज

सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि पैरोल मिलने पर सलेम फरार हो सकता है, जिससे भारत और पुर्तगाल के बीच कूटनीतिक संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा. CBI ने भी पैरोल के खिलाफ पक्ष लिया है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को तय की है. सरकार ने कहा कि सलेम एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी है और उसकी पैरोल से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है.

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अबू सलेम (फाइल फोटो) अबू सलेम (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:01 PM IST

1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी अबू सलेम को पैरोल दिए जाने का महाराष्ट्र सरकार ने कड़ा विरोध किया है. राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि अगर सलेम को पैरोल दी गई तो उसके फरार होने की आशंका है जिससे भारत और पुर्तगाल के बीच कूटनीतिक संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है. ये जानकारी महाराष्ट्र सरकार ने जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस श्याम चंदक की डिवीजन बेंच के समक्ष दाखिल हलफनामे में दी.

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अबू सलेम ने अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी के निधन के बाद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाने के लिए 14 दिन की पैरोल मांगी है. सलेम का भाई नवंबर 2025 में निधन हो गया था. सलेम ने साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाके आजमगढ़ के सरायमीर जाने की अनुमति मांगी है.

राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में जेल महानिरीक्षक सुहास वारके ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को पैरोल दी गई तो वह दोबारा फरार हो सकता है, जैसा कि वह 1993 में हुआ था. सरकार ने कोर्ट को बताया कि सलेम के फरार होने की स्थिति में न केवल कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या खड़ी होगी, बल्कि भारत-पुर्तगाल संबंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा.

इस मामले में CBI ने भी हस्तक्षेप करते हुए खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की, क्योंकि ये एजेंसी सलेम के खिलाफ मामलों में अभियोजन एजेंसी है. CBI ने भी पैरोल दिए जाने का विरोध किया और कहा कि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. हालांकि जब हाईकोर्ट ने CBI से पूछा कि किस तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या की आशंका है तो एजेंसी के वकील ने इस पर निर्देश लेकर जवाब देने के लिए समय मांगा. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी के लिए तय कर दी.

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राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि अबू सलेम एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी है जो दशकों से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है. उसे 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत लाया गया था, जिसमें दोनों देशों के बीच कुछ शर्तें तय की गई थीं. हलफनामे में कहा गया कि भारत सरकार पर ये जिम्मेदारी है कि वो पुर्तगाल को दी गई सभी गारंटियों और आश्वासनों का पालन करे. अगर सलेम अब फरार होता है तो ये दोनों देशों के बीच गंभीर विवाद का कारण बन सकता है. पुर्तगाल में सलेम को फर्जी पासपोर्ट पर यात्रा करने के मामले में दोषी ठहराया गया था.

सरकार ने यह भी बताया कि सलेम की पैरोल याचिका पर उत्तर प्रदेश पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसमें सरायमीर को साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाका बताया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि वहां सलेम की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. इसी आधार पर सलेम की 14 दिन की पैरोल याचिका खारिज कर दी गई. हालांकि सरकार ने कहा कि अधिकतम दो दिन की आपातकालीन पैरोल पर विचार किया जा सकता है, जिसमें यात्रा का समय भी सजा की अवधि में जोड़ा जाएगा.

अबू सलेम को 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस समेत तीन मामलों में उम्रकैद, जबकि अन्य मामलों में 25 साल की सजा सुनाई गई है. सलेम ने अपनी याचिका में कहा है कि नवंबर 2005 में गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में है और उसे अब तक सिर्फ मां और सौतेली मां के निधन के समय ही सीमित पैरोल दी गई थी.

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