आज का दिन: क्या एंटोनियो गुटेरेस निकाल पाएंगे रूस-यूक्रेन जंग का हल?

करीब दो महीने से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए क्या यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस कोई निकाल पाएंगे हल? क्या AAP-BTP मिलकर गुजरात चुनाव में BJP का नुकसान कर पाएंगी? असम में क्यों हो रही कांग्रेस की दुर्गति? ट्रेन से गिरकर घायल होंगे तो मिलेगा मुआवज़ा!

Advertisement
पुतिन से मिले यूएन महासचिव पुतिन से मिले यूएन महासचिव

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 9:41 AM IST

आजतक रेडियो' के मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में सुनेंगे - रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए क्या यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस निकाल पाएंगे हल? क्या AAP-BTP मिलकर गुजरात चुनाव में BJP का नुकसान कर पाएंगी? असम में क्यों हो रही कांग्रेस की दुर्गति? ट्रेन से गिरकर घायल होंगे तो मिलेगा मुआवज़ा! 

आजतक रेडियो पर हम रोज़ लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं.

Advertisement

क्या यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस निकाल पाएंगे रूस-यूक्रेन जंग का हल?

रूस यूक्रेन के बीच चल रही जंग को 2 महीने बीत चुके हैं. दोनों देशों के अग्रेसिव बयानों से ये कहना मुश्किल है कि इस युद्ध का हल बातचीत से निकलेगा. इस बीच यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरस कल मॉस्को दौरे पर थे, जहां उन्होंने मास्को में सर्गेई लावरोव, जो रूसी विदेश मंत्री हैं उनसे मुलाकात की. मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. इससे पहले गुटेरस टर्की के राष्ट्रपति से भी मिले थे जिन्होंने युद्ध में इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता का प्रयास किया था, हालांकि वो प्रयास बेनतीजा रहा. ख़ास बात ये है कि यूएन सेक्रेटरी जनरल के रूसी विदेश मंत्री से इस मुलाकात का यूएन में  विरोध हो रहा है. और गुटेरस का अगला दौरा यूक्रेन का होगा, जहाँ वो कल यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेन्स्की से मिलेंगे. रूसी विदेश मंत्री से भेंटवार्ता के बाद कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुटेरस ने कहा भी कि यूएन इस मुद्दे का हल जल्दी चाहता है क्योंकि इस युद्ध से बड़ी संख्या में जिंदगियां प्रभावित हो रही हैं.  फिलहाल ये समझने के लिए कि कल की इस मुलाकात की बड़ी बातें क्या रहीं और बातचीत के लिए किन मुद्दों पर पर गुटेरस का ज्यादा फोकस रहा? क्या ज़ेंलेस्की से मुलाक़ात के बाद कोई हल निकलेगा इस मसले का?

Advertisement

AAP-BTP मिलकर क्या गुजरात चुनाव में कर पाएंगी BJP का नुकसान?

गुजरात विधानसभा चुनाव में ज़्यादा वक़्त नहीं बचा है. इसलिए राजनीतिक पार्टियां चुनावी गुणा गणित सेट करने में जुट गई हैं. पंजाब की ऐतिहासिक जीत से गदगद आम आदमी पार्टी अब गुजरात में भी अपना दमखम दिखाना चाहती है. और इसके लिए AAP अपनी ज़मीन तैयार करने में लग गई है. AAP ने गुजरात की भारतीय ट्राईबल पार्टी के साथ गठबंधन को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया है. कल बीटीपी के विधायक महेश वसावा अहमदाबाद में आम आदमी पार्टी के दफ़्तर पहुंचे और स्टेट चीफ गोपाल इटालिया के साथ एक प्रेस कांफ्रेस में ऐलान किया कि दोनों पार्टियां एक साथ चुनावी मैदान में उतरेंगी.अब सवाल ये उठता है कि  BTP का जनाधार कितना है और गुजरात के किन इलाकों में इसकी पकड़ है? पिछले चुनावों में भारतीय ट्राइबल पार्टी का परफॉर्मेंस कैसा रहा है? किन पार्टियों के साथ अलायन्स में रही है और सीटों का क्या हिसाब किताब रहा है?

असम में क्यों हो रही कांग्रेस की दुर्गति?

कांग्रेस पार्टी अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. पार्टी को संजीवनी देने के लिए बुलाए जा रहे पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर ने भी कल हाथ जोड़ लिया और कांग्रेस में शामिल होने से इंकार कर दिया. एक के बाद एक पराजय से पस्त कांग्रेस को पिछले दिनों असम में ज़बरदस्त झटका लगा था. असम की मेन अपोजिशन पार्टी है कांग्रेस, और गुवाहाटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के नतीजों में पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया. और उससे भी बड़ी बात, ज़्यादातर वार्ड्स में पार्टी तीसरे नंबर पर रही. दूसरी तरफ बीजेपी ने 60 में से 58 सीटों पर जीत का परचम लहराया. AAP और असम जातीय परिषद जैसी पार्टियां एक-एक सीट जीत सकीं. तो कांग्रेस की इस दुर्गति को कैसे देखा जाए, उसकी हार के फैक्टर्स  क्या रहे? असम में कांग्रेस और AIUDF से मुस्लिम वोटर क्यों छिटक रहे हैं?

Advertisement

ट्रेन से गिरकर घायल होंगे तो मिलेगा मुआवज़ा!

देश की ज़्यादातर आबादी ट्रेन में सफ़र करती है. इसलिए देश के किसी भी कोने में चले जाएँ, एक चीज़ जो सबसे कॉमन है ट्रेनों में, वो है भीड़. उसमें भी मुंबई के क्या कहने, वहां की लोकल ट्रेनें तो लाइफ लाइन कही जाती हैं. पैसेंजर्स से खचाखच भरी रहती हैं. जाहिर है, भीड़ के चलते ट्रेनों में अक्सर धक्का मुक्की हो जाया करती है. इस धक्का मुक्की में कई बार अप्रिय घटनाएं भी घट जाती हैं. ऐसा ही एक वाकया हुआ पिछले साल 23 नवंबर की शाम को. 75 साल के नितिन हुंडीवाला अपने काम से लौट रहे थे. विख्रोली से दादर की ट्रेन ली. ट्रेन में भारी भीड़ थी. जैसे तैसे जगह मिली तो दरवाजे के पास खड़े हो गए. ट्रेन के खुलते ही थोड़ी धक्का मुक्की हुई तो उनका बैलंस बिगड़ गया और वो बाहर गिर पड़े. उन्हें सिर और पैर में काफी चोटें आईं. गनीमत थी की जान बच गई. करीब दो हफ़्ते और दो लाख रुपए अस्पताल में खर्च करने के बाद वो थोड़े ठीक हुए. लेकिन चोट के चलते चलने फिरने और उठने बैठने में दिक्क्त होती रही. इस एक्सीडेंट के एवज में उन्होंने रेलवे से 4 लाख का मुआवजा माँगा, जिसे रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने ख़ारिज कर दिया. परेशान होकर नितिन बॉम्बे हाई कोर्ट की शरण में जा पहुंचे. कल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया, रेलवे से कहा कि हादसे का शिकार हुए शख्स को तीन लाख का कॉम्पेन्सेशन दे. तो पहले रेलवे ने किस आधार पर घायल पैसेंजर की मांग ख़ारिज की थी और कोर्ट ने किन नियमों का हवाला देकर मुआवजा देने का आदेश दिया?ये फैसला क्या आने वाले समय में ऐसी घटनाओं के लिए नज़ीर बन सकता है?

Advertisement

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के दिन की इतिहास में अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.

27 अप्रैल 2022 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें...

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement