मुंबई के मीरा भायंदर से सामने आए एक चौंकाने वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी. वीडियो में एक युवक सड़क पर जोंबी जैसी हालत में खड़ा नजर आ रहा था. उसकी हरकतें असामान्य थीं और वह पुतले की तरह स्थिर दिखाई दे रहा था. दावा किया गया कि यह 'जोंबी ड्रग' का असर है. लेकिन अब इस वीडियो की सच्चाई सामने आ गई है, जो ज्यादा गंभीर और खतरनाक है.
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए इस वीडियो में युवक की चाल-ढाल और व्यवहार पूरी तरह असामान्य दिख रहा था. वह जैसे होश में ही नहीं था. हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि यह मामला किसी 'जोंबी ड्रग' का नहीं, बल्कि 'प्रेगाबालिन' (Pregabalin) नामक दवा से जुड़ा है. यह नर्व सिस्टम से संबंधित दर्द में दी जाने वाली एक पेन किलर दवा है, जिसे डॉक्टर की सलाह पर लिया जाना चाहिए.
पुलिस के मुताबिक, युवक ने एक साथ करीब 10 गोलियां खा ली थीं, जिसके बाद उसका व्यवहार पूरी तरह असामान्य हो गया. जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई. आज तक/इंडिया टुडे की पड़ताल में पाया गया कि 'प्रेगाबालिन' एक शेड्यूल ड्रग है. इसे बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बेचना और खरीदना कानूनन अपराध है. लेकिन इसके उलट जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है.
आज तक/इंडिया टुडे की टीम मुंबई के कई मेडिकल स्टोर्स पर पहुंची. सिर्फ मोबाइल पर दवा का नाम दिखाया गया और बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के शेड्यूल ड्रग आसानी से मिल गई. जबकि इस तरह की दवाओं को बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं दिया जा सकता है.
रियलिटी चेक के दौरान ग्राउंड पर क्या मिला...
- पहले मेडिकल स्टोर की पड़ताल
सबसे पहले हम महावीर मेडिकल स्टोर पहुंचे. यहां हमने बिना पर्ची के 'प्रेगाबालिन' 300 mg की दवा मांगी. मोबाइल में नाम दिखाया गया. केमिस्ट ने बताया कि 300 mg उपलब्ध नहीं है, लेकिन 75 mg की दवा मौजूद है. वो बिना किसी पर्ची के दवा देने के लिए तैयार हो गया. जबकि यह शेड्यूल ड्रग है और बिना प्रिस्क्रिप्शन बेचना गैरकानूनी है.
- दूसरे मेडिकल स्टोर की पड़ताल
इसके बाद हम पास ही स्थित भाटिया मेडिकल स्टोर पहुंचे. यहां भी हमने सिर्फ मोबाइल पर दवा का नाम दिखाया. कोई पर्ची नहीं दिखाई. फिर भी 300 mg की दवा देने के लिए बिल तक बना दिया गया. हालांकि, हमने बहाना बनाकर कहा कि डॉक्टर से कन्फर्म कर लेंगे और वहां से बाहर आ गए. लेकिन यहां भी बिना पर्ची के दवा बेची जा रही थी.
- तीसरे मेडिकल स्टोर की पड़ताल
तीसरे मेडिकल स्टोर का नाम शिवम मेडिकल है, जो शिवम नर्सिंग होम के नीचे स्थित है. यहां 300 mg की दवा उपलब्ध नहीं थी, लेकिन 75 mg की दवा मौजूद थी. जब हमने पूछा कि यह दवा किस काम आती है, तो दुकानदार ने बताया कि नसों के दर्द के लिए इसका इस्तेमाल होता है. इस तरह उसे दवा की गंभीरता और उपयोग की जानकारी थी.
इसके बावजूद बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के दवा देने में कोई हिचक नहीं दिखी.
- चौथे मेडिकल स्टोर की पड़ताल
इसके बाद हम सुनील मेडिकल स्टोर पहुंचे. यहां 75 mg की दवा आसानी से उपलब्ध थी. बिना पर्ची के दवा देने के साथ-साथ दुकानदार ने सलाह भी दी कि यदि 300 mg चाहिए तो 75 mg की चार गोलियां ले सकते हैं या 150 mg की दो गोलियां लेना ज्यादा बेहतर रहेगा. इतना ही नहीं, उसने यह भी बताया कि 150 mg की दवा कहां मिलेगी.
इन सभी जगहों पर एक बात समान रही, ना केमिस्ट ने कोई सवाल पूछा, ना किसी ने आपत्ति जताई. कागजों में नियम भले ही सख्त हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन बेहद ढीला है. यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में मुंबई के नेस्को में आयोजित एक म्यूजिक शो के दौरान ड्रग्स ओवरडोज से दो छात्रों की मौत हो चुकी है.
ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाता है. जब ये दवाएं नियंत्रित श्रेणी में आती हैं, तो फिर बाजार में खुलेआम कैसे बिक रही हैं? क्या इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी? फिलहाल पुलिस जांच की बात कर रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल सिस्टम पर खड़ा है, जहां नियम तो मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा.
बिना प्रिस्क्रिप्शन बेचने की अनुमति नहीं
डॉ. आदिल छागला (न्यूरो सर्जन) ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, "यह ड्रग्स सेंसेशन पर असर करते हैं. ये दवाएं मूल रूप से सीजर के लिए बनाई गई थीं, लेकिन नर्व सिस्टम में दर्द कम करने के लिए भी हम इन्हें प्रिस्क्राइब करते हैं. कई बार सेंसेशन इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति इस स्थिति में सुसाइड तक कर सकता है. बिना प्रिस्क्रिप्शन के ऐसी दवाएं बेचने की अनुमति नहीं है. यह सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का भी मामला है कि इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के न बेचा जाए. यह ड्रग वही डॉक्टर लिख सकता है जिसे इसकी पूरी जानकारी हो और जिसने इसके प्रभाव को समझा हो."
वहीं, डीसीपी क्राइम संदीप दोइफोडे ने कहा, "ये मामला किसी जोंबी ड्रग का नहीं है. बल्कि यह प्रेगाबलीन नाम की दवा से जुड़ा हुआ है. यह नर्व सिस्टम से संबंधित एक पेन किलर है, जिसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लिया जाना चाहिए.युवक ने एक साथ करीब 10 गोलियां खा ली थीं, जिसके बाद उसका व्यवहार पूरी तरह असामान्य हो गया. जांच में हैरान करने वाली बात सामने आई है."
दीपेश त्रिपाठी