साइबर फ्रॉड करने वालों के एक गैंग ने ठाणे के एक 64 साल के आदमी से 1.56 करोड़ रुपये ठग लिए. गैंग ने खुद को पुलिसवाला बताकर उसे करीब एक महीने तक "डिजिटल अरेस्ट" में रखा. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी.
अधिकारी के मुताबिक पीड़ित ने बताया कि जालसाजों ने उसे कई नकली डॉक्यूमेंट भेजे, जिसमें मुंबई पुलिस की नकली FIR और इंटरपोल के नकली 'रेड कॉर्नर' नोटिस शामिल थे. जिससे पीड़ित डर गए. जिसके बाद ठगों ने उन्हें 12 फरवरी से 7 मार्च तक 'डिजिटल अरेस्ट' करके रखा.
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ऐसे की गई ठगी
आरोपियों ने खुद को पुलिसवाला बताकर पीड़ित से अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क किया और दावा किया कि उसके खिलाफ 40 महिलाओं को अश्लील मैसेज और वीडियो भेजने की शिकायत दर्ज कराई गई है. बदलापुर ईस्ट पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि डर बढ़ाने के लिए उन्होंने उससे कहा कि उसका आधार कार्ड और बैंक डिटेल्स एक जाने-माने व्यक्ति से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े हैं.
जालसाजों ने पीड़ित को लगातार निगरानी रखने के लिए उसकी पत्नी के मोबाइल फोन पर सिग्नल मैसेजिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया. जिसके बाद ऐप पर कई नकली डॉक्यूमेंट्स भेजे, जिनमें पीड़ित के नाम पर नकली मुंबई पुलिस FIRs, एक बोगस बैंक लेटर और ATM कार्ड की तस्वीरें शामिल थीं.
अधिकारी ने कहा कि उन्होंने उसे यह यकीन दिलाने के लिए नकली इंटरपोल 'रेड कॉर्नर' नोटिस भी भेजे कि वह हाई-लेवल जांच के दायरे में है. "डिजिटल गिरफ्तारी" की आड़ में जालसाजों ने पीड़ित को लगातार ऑडियो और वीडियो निगरानी में रखा. जिससे वह मदद नहीं मांग सका. अधिकारी ने कहा, "आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित के बैंक अकाउंट और सेविंग्स वेरिफिकेशन के लिए RBI को सरेंडर करने होंगे. बहुत ज़्यादा डर का माहौल बनाकर, वे उसकी सारी फाइनेंशियल जानकारी इकट्ठा करने में कामयाब रहे और उसे RTGS के ज़रिए अलग-अलग बैंक अकाउंट में कुल 15645000 रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश दिया."
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बाद में पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है और उसने सोमवार को पुलिस से संपर्क किया. शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोमवार को कई लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) (एक्सटॉर्शन), 318 (चीटिंग) और 61(2) (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के प्रोविज़न के तहत FIR दर्ज की.
पुलिस ने शुरू की जांच
अधिकारी ने कहा कि हालांकि हमने उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए नामों से धोखेबाजों की पहचान कर ली है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. पुलिस पैसे के ट्रेल का पता लगाने और संदिग्धों का पता लगाने के लिए क्राइम की आगे जांच कर रही है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले महीने विधानसभा में कहा था कि 'डिजिटल अरेस्ट' एक फ्रॉड है और कानूनी तौर पर सही नहीं है.
अगर पीड़ित साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट हेल्पलाइन 1930 पर ज़रूरी "गोल्डन आवर" (फ्रॉड ट्रांज़ैक्शन रोकने के लिए ज़रूरी) के अंदर करते हैं, तो लगभग 90 परसेंट पैसा वापस मिल सकता है.
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