टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच यौन उत्पीड़न की शिकायतों में पांच गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 125 मामलों तक पहुंच गया है. हाल ही में नासिक बीपीओ यूनिट में भी उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद पुलिस और आंतरिक जांच समिति (ICC) ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है. टीसीएस सूत्रों का कहना है कि यह वृद्धि वास्तव में आंतरिक रिपोर्टिंग सिस्टम में हुए सुधार और 'पॉश' (POSH) ढांचे के प्रति महिला कर्मचारियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है. शिकायतों का अनुपात 2023-24 के 0.05% से बढ़कर 2024-25 में 0.06% हो गया है.
रिपोर्टिंग सिस्टम पर कंपनी की सफाई
टीसीएस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि शिकायतों की संख्या बढ़ना कार्यस्थल पर असुरक्षा का संकेत नहीं, बल्कि बेहतर मॉनिटरिंग और जागरूकता का परिणाम है. कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में आंतरिक तंत्र को मजबूत किया है, जिससे महिलाएं अब फॉर्मल शिकायत दर्ज कराने में अधिक सहज महसूस कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह ट्रेंड संवेदीकरण (Sensitization) और ट्रेनिंग कार्यक्रमों की सफलता को दिखाता है, न कि गलत व्यवहार की घटनाओं में कोई आनुपातिक वृद्धि.
नासिक यूनिट का हाल और सच्चाई
नासिक यूनिट में कामकाज ठप होने की खबरों के बीच सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ऑफिस सील या बंद नहीं किया गया है. वर्तमान में लगभग 60 लोग ऑफिस से काम कर रहे हैं, जबकि अन्य कर्मचारियों को घर या ऑफिस से काम करने का विकल्प (Discretion) दिया गया है. मामले में नामजद निदा खान के बारे में स्पष्ट किया गया है कि वह एचआर (HR) नहीं, बल्कि एक टेलीकॉलर है. कंपनी जांच पूरी होने तक अपने मानक प्रोटोकॉल और प्रशासनिक अवकाश संबंधी नियमों का पालन कर रही है.
इस बीच खबर सामने आई है कि TCS BPO नासिक की एग्जीक्यूटिव निदा खान प्रेग्नेंट हैं और मुंबई में हैं. खुद उनके वकील ने यह जानकारी दी है. वकील के मुताबिक, वह मुंबई में अपने परिवार के साथ रह रही हैं; वह फरार नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दी है. इस अर्जी पर नासिक कोर्ट में सुनवाई हो सकती है. वहीं, निदा खान की तलाश में नासिक पुलिस की एसआईटी भिवंडी पहुंच गई है.
सुरक्षा ऑडिट और आंतरिक जांच
कंपनी हर साल 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013' के तहत अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति के जरिए इन मामलों का निपटारा करती है. नासिक और नागपुर बीपीओ ऑपरेशंस में लगे आरोपों पर कंपनी अपनी मानक प्रक्रिया के तहत पूछताछ कर रही है. कर्मचारी सुरक्षा और बिजनेस निरंतरता को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कुछ बदलाव किए गए हैं. कंपनी का मुख्य फोकस अब रिपोर्टिंग इकोसिस्टम को और अधिक पारदर्शी बनाना है.
दिव्येश सिंह