नासिक TCS कांड में खुलासा, शादी का झांसा देकर बनाए संबंध, आरोपी दानिश शेख निकला दो बच्चों का पिता

नासिक के TCS BPO में यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार कर नौ एफआईआर दर्ज की हैं. एसआईटी जांच कर रही है और कंपनी ने आरोपियों को निलंबित किया है. मामले ने कार्यस्थल सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं.

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यौन शोषण, धर्म परिवर्तन और मलेशिया लिंक से बढ़ा विवाद (Photo: Screengrab) यौन शोषण, धर्म परिवर्तन और मलेशिया लिंक से बढ़ा विवाद (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नासिक,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS के बीपीओ कार्यालय में सामने आए यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और पुलिस ने जांच तेज कर दी है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे यह मामला और गंभीर होता जा रहा है. इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी में हुई, जब एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने नासिक सिटी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया कि टीसीएस के बीपीओ यूनिट में काम करने वाली एक हिंदू महिला रमजान का रोजा रख रही है. इस सूचना के बाद पुलिस सतर्क हुई और पूरे मामले की गुप्त तरीके से जांच शुरू की गई.

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पुलिस ने टीसीएस कार्यालय में एक कोवर्ट ऑपरेशन चलाया. चार पुलिसकर्मियों ने हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर ऑफिस में एंट्री ली और कर्मचारियों के बीच हो रही गतिविधियों पर नजर रखी. करीब दो हफ्ते तक चले इस ऑपरेशन में पुलिस को कई अहम जानकारी मिली, जिसके बाद कार्रवाई शुरू की गई. जांच में सामने आया कि कंपनी के कुछ टीम लीडर अपने सहकर्मियों के साथ यौन शोषण, रेप और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसी गतिविधियों में शामिल थे.

पुलिस के मुताबिक, व्हाट्सएप चैट्स के जरिए भी कई सबूत मिले हैं. जांच में यह भी पता चला कि मलेशिया से जुड़े एक उपदेशक इरमान को वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों से जोड़ा गया था. इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार आरोपियों में आसिफ अंसारी, दानिश, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और अश्विन चैनानी शामिल हैं. वहीं एचआर मैनेजर निदा खान फरार बताई जा रही हैं और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस उनके द्वारा की गई नियुक्तियों और कार्यप्रणाली की भी जांच कर रही है.

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हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर पुलिस ने जुटाए सबूत

पुलिस ने अब तक यौन शोषण और धर्म परिवर्तन से जुड़े कम से कम नौ एफआईआर दर्ज की हैं. इनमें से ज्यादातर शिकायतें 18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों की हैं, जो कंपनी में 18 हजार से 25 हजार रुपये तक की सैलरी पर काम कर रही थीं. इन महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनकी शिकायतों को एचआर विभाग ने नजरअंदाज कर दिया.  इस मामले की जांच के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है, जिसका नेतृत्व एसीपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं.

एसीपी (क्राइम) संदीप मिटके इस जांच की अगुवाई कर रहे हैं. पुलिस आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें किसी तरह की फंडिंग मिली थी या नहीं. पहली एफआईआर उस महिला की शिकायत पर दर्ज की गई, जो रमजान का रोजा रख रही थी. पुलिस के अनुसार, वह महिला आरोपी दानिश शेख के साथ रिश्ते में थी. दानिश ने उससे शादी का वादा किया, लेकिन यह छिपाया कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं.

पुलिस का कहना है कि शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप की श्रेणी में रखा गया है. साथ ही महिला को इस्लाम अपनाने के लिए प्रभावित करने के आरोप में धार्मिक भावनाएं आहत करने की धाराएं भी जोड़ी गई हैं. जैसे ही यह मामला सामने आया, अन्य महिला कर्मचारी भी आगे आईं और उन्होंने भी इसी तरह के आरोप लगाए. कई एफआईआर में यह बात सामने आई कि जो महिलाएं आरोपियों की बात नहीं मानती थीं, उनके काम का बोझ बढ़ा दिया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता था. कुछ मामलों में अश्लील टिप्पणी, अनुचित स्पर्श और पीछा करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं.

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सात गिरफ्तार, नौ एफआईआर दर्ज, एचआर मैनेजर फरार

टीसीएस की तरफ से इस मामले पर बयान जारी किया गया है. कंपनी ने कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या दबाव के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति रखती है. कंपनी ने यह भी कहा कि जैसे ही मामला सामने आया, संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है. टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमण्यम ने कहा है कि जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो कंपनी अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करेगी और उन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा.

इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है. बीजेपी नेता बंदी संजय कुमार ने इसे कॉरपोरेट जिहाद का मामला बताया है. वहीं महाराष्ट्र में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई की मांग की है. शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी टीसीएस की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसे अपर्याप्त बताया है. उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर घटनाओं पर कंपनी का रुख निराशाजनक है. 

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों ने महिलाओं को नौकरी और बेहतर वेतन का लालच देकर फंसाया और उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट सेक्टर में कार्यस्थल की सुरक्षा, आंतरिक शिकायत प्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों में इस मामले को लेकर आक्रोश है और यह मांग उठ रही है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और कंपनियों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
 

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