टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक स्थित बीपीओ केंद्र से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण विवाद में नामजद आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है. अदालत ने मामले में आदेश सुरक्षित रखते हुए फैसला 2 मई को सुनाने की बात कही है. इस मामले में निदा खान उन आठ आरोपियों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है.
निदा खान ने अदालत में अग्रिम जमानत की मांग की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका पक्ष रखते हुए परिवार और वकील ने दावा किया कि वह केवल टेली-कॉलर के रूप में कार्यरत थीं और HR विभाग का हिस्सा नहीं थीं. हालांकि, एक निलंबन पत्र में उनका पद 'प्रोसेस एसोसिएट' दर्ज बताया गया है.
परिवार का कहना है कि उन्हें बेवजह विवाद में घसीटा गया है. निदा खान के पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने कोई गलत काम नहीं किया. वह रोज की तरह दफ्तर जाती थी और लोगों से सामान्य तौर पर अभिवादन करती थी. उनका कहना है कि इसी कारण वह इस विवाद में फंस गई. वहीं, उनके वकील ने अदालत को बताया कि निदा खान गर्भवती हैं, जिसे जमानत याचिका में मानवीय आधार के रूप में भी रखा गया है.
लकड़ी व्यापार से जुड़ा है निदा खान का परिवार?
परिवार के अनुसार, निदा खान के परिवार का मुख्य कारोबार मुंबई में लकड़ी व्यापार से जुड़ा है. निदा की शादी पिछले वर्ष हुई थी और जनवरी में वह अपने पति के साथ मुंबई रहने चली गई थीं. बताया गया है कि वह अप्रैल 9 तक मुंबई के मलाड स्थित बीपीओ कार्यालय में कार्यरत थीं, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया.
कैसे सामने आया था मामला?
उनके वकील के अनुसार, उन्हें कम से कम चार महीने पहले मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया था और मौजूदा समय में उनका परिवार व पति भी मुंबई में ही रहते हैं. यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नासिक स्थित बीपीओ कार्यालय में कार्यरत 23 वर्षीय महिला कर्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई. उसने अपने वरिष्ठ सहकर्मी दानिश शेख पर यौन उत्पीड़न और विवाह का झूठा वादा कर संबंध बनाने का आरोप लगाया. शिकायत में यह भी कहा गया कि दानिश शेख और एक अन्य सहकर्मी तौसीफ ने उसे इस्लाम धर्म के पक्ष में समझाने की कोशिश की.
दिव्येश सिंह