महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का असमय निधन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेतृत्व में खाली स्थान छोड़ गया है. अजित पवार न सिर्फ महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे बल्कि अपनी पार्टी के अध्यक्ष भी थे. अब सवाल है कि एनसीपी का नेतृत्व कौन करेगा? संकट की इस घड़ी में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार पर है.
राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार इस गुट का नेतृत्व करने और अपने पति की राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए सबसे संभावित उम्मीदवार के तौर पर उभरी हैं.
आखिर नेता, कार्यकर्ता और राजनीतिक विशेषज्ञ भी क्यों मानते हैं कि इस घड़ी में सुनेत्रा पवार ही एनसीपी को नेतृत्व और भरोसा दे सकती हैं.
1.स्वाभाविक उत्तराधिकारी और एकजुट करने वाली हस्ती
अजित पवार की पत्नी होने के नाते सुनेत्रा को उनके राजनीतिक सिंहासन की स्वाभाविक दावेदार माना जाता है. प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल सहित पार्टी के सीनियर नेताओं का मानना है कि पार्टी को एकजुट रखने के लिए उनका नेतृत्व ज़रूरी है. वे उन्हें एक ऐसी हस्ती के तौर पर देखते हैं जिसका कोई भी विधायक या सांसद विरोध नहीं करेगा, जिससे संभावित अंदरूनी सत्ता संघर्ष या शरद पवार के खेमे में वापस जाने से बचा जा सकेगा.
छगन भुजबल ने यह भी कहा है कि कल लेजिस्लेटिव पार्टी की मीटिंग के बाद सुनेत्रा ताई को CLP लीडर चुना जाएगा.
हालांकि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से बात करने के बाद कुछ टेक्निकल बातों को पूरा करना ज़रूरी है. वे इसे देख रहे हैं.
2. स्थापित राजनीतिक पहचान
परिवार के कई सदस्यों के उलट जो पर्दे के पीछे रहते हैं, सुनेत्रा ने पहले ही "राजनीति में कदम रख लिया है." बारामती लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले के खिलाफ उनके हाई-प्रोफाइल मुकाबले ने उन्हें पूरे राज्य में काफी पहचान दिलाई. हार के बावजूद राज्यसभा के लिए उनके बाद के नॉमिनेशन ने एक उन्हें औपचारिक राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर उनकी स्थिति को और मजबूत कर दिया है. लिहाजा पार्टी सुनेत्रा पवार में ही एनसीपी का उत्तराधिकार देखते हैं.
3.तपे-तपाये उत्तराधिकारियों की कमी
अजित के बेटे पार्थ और जय परिवार की विरासत का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें अभी लीडरशिप के लिए तैयार नहीं माना जाता. पार्थ पवार को चुनावी झटके और विवादों का सामना करना पड़ा है, जबकि जय को बहुत अनुभवहीन माना जाता है. इस लीडरशिप की कमी ने सुनेत्रा को एकमात्र संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर सबसे आगे ला दिया है.
4. गहरी सामाजिक और शैक्षणिक जड़ें
राजनीति से इतर सुनेत्रा ने अपने काम से एक ज़बरदस्त प्रोफ़ाइल बनाई है. वह बारामती टेक्सटाइल की चेयरमैन हैं और उन्होंने एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ़ इंडिया की स्थापना की है. विद्या प्रतिष्ठान और सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में उनकी लीडरशिप भूमिकाओं ने उन्हें बहुत ज़्यादा लोगों का सम्मान और स्थानीय जुड़ाव दिलाया है.
5. मज़बूत राजनीतिक बैकग्राउंड
राजनीतिक समझ सुनेत्रा परिवार के परिवार में है. वह पूर्व मंत्री और लोकसभा सांसद पद्मसिंह पाटिल की बहन और बीजेपी नेता और विधायक राणा जगजीत सिंह की बुआ हैं. महाराष्ट्र की राजनीति से इस गहरे जुड़ाव की वजह से उन्हें जटिल महायुति गठबंधन को संभालने के लिए ज़रूरी स्ट्रेटेजिक नेटवर्क मिलता है.
ऋत्विक भालेकर