गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को चंद्रपुर नगर निगम में बड़ा झटका लगा है. यहां उसकी सहयोगी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बीच हुए अचानक गठजोड़ के चलते बीजेपी का महापौर चुना गया, जबकि कांग्रेस इस पद पर दावा करने की स्थिति में थी. बीजेपी की संगीता खंडेकर ने महापौर चुनाव में सिर्फ एक वोट से कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महाडुले को हराया.
इस चुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बीजेपी का समर्थन किया. शिवसेना (उद्धव गुट) के पार्षद प्रशांत दानव को उपमहापौर चुना गया. इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकजुटता और महा विकास आघाड़ी की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि शिवसेना (उद्धव गुट) महा विकास आघाड़ी और इंडिया गठबंधन दोनों में कांग्रेस की अहम सहयोगी है.
चंद्रपुर में कांग्रेस रही सबसे आगे
चंद्रपुर उन गिने-चुने नगर निगमों में शामिल है, जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और महापौर पद हासिल करने के करीब थी. लेकिन विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर गुटों के बीच अंदरूनी खींचतान ने बीजेपी को मौका दे दिया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वे पूरी जानकारी लेने के बाद इस पर चर्चा करेंगे.
कांग्रेस ने लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि इस चुनाव में खरीद-फरोख्त हुई है. उन्होंने इस हार के लिए शिवसेना (उद्धव गुट), AIMIM और वंचित बहुजन आघाड़ी को जिम्मेदार ठहराया.
सपकाल ने कहा कि चंद्रपुर महापौर चुनाव में बीजेपी को 32 और कांग्रेस को 31 वोट मिले. शिवसेना (उद्धव गुट) के छह पार्षदों से कांग्रेस को समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने बीजेपी का साथ दिया. उन्होंने कहा कि इसके राज्य की राजनीति पर असर होंगे.
एक नजर नतीजों पर
पिछले महीने 66 सदस्यीय नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. बीजेपी को 23 सीटें मिली थीं. शिवसेना (उद्धव गुट) ने छह, भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष ने तीन और वंचित बहुजन आघाड़ी ने दो सीटें जीती थीं. AIMIM, बहुजन समाज पार्टी और शिवसेना को एक-एक सीट मिली थी. दो निर्दलीय भी चुने गए थे.
अभिजीत करंडे