शिंदे गुट के MLA को कोर्ट से झटका... खतरे में विधायकी, गलत एफिडेविट मामले में चलेगा मुकदमा

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विधायक अमोल खताल को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने गलत चुनावी हलफनामा देने के मामले में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट की याचिका को खारिज करने की उनकी मांग ठुकराते हुए ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया है.

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शिवसेना विधायक अमोल खताल. (Photo: X/@ShivSena) शिवसेना विधायक अमोल खताल. (Photo: X/@ShivSena)

विद्या

  • मुंबई,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने सोमवार को शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक अमोल खताल की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट की याचिका को रद्द करने की मांग की थी. जस्टिस किशोर संत की बेंच अब इस मामले में ट्रायल आगे बढ़ाएगी. थोराट ने खताल के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में आय के स्रोत और टैक्स बकाया की सही जानकारी नहीं दी थी. 

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बालासाहेब थोराट की ओर से वकील आर. एम. धोरडे और अमित करांडे कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने मांग की है कि संगमनेर सीट से अमोल खताल का चुनाव निरस्त घोषित किया जाए. साथ ही, उन्होंने खुद को निर्वाचित घोषित करने की भी अपील की है. अमोल खताल ने हाई कोर्ट से बालासाहेब थोराट की इसी याचिका को खारिज करने की मांग की थी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को होगी. महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद कई याचिकाएं दाखिल हुई थीं, जिनमें से अधिकतर शुरुआती चरण में ही खारिज कर दी गईं. 

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हालांकि, इस मामले में हाई कोर्ट ने ट्रायल जारी रखने का फैसला लिया है. बालासाहेब थोराट ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि अमोल खताल ‘नीलकमल’ नाम की फर्म में पार्टनर हैं और उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए जीएसटी डिपार्टमेंट की वेबसाइट का हवाला दिया. थोराट के अनुसार, फर्म पर प्रोफेशनल टैक्स का बकाया है, जिसे खताल ने अपने हलफनामे में नहीं बताया. बालासाहेब थोराट का दावा है कि खताल ने फॉर्म-26 में सरकारी बकाया ‘0’ बताया, जबकि कुल बकाया 54,650 रुपये (जिसमें 25,000 रुपये मूल राशि और 26,650 रुपये ब्याज) है. 

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अमोल खताल ने अपने बचाव में दलील दी कि वह अब ‘नीलकमल’ फर्म के पार्टनर नहीं हैं और फर्म भंग हो चुकी है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर इस दलील पर विचार करना जरूरी नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने जीएसटी वेबसाइट से डाउनलोड दस्तावेज पेश किए हैं, जिसमें फर्म सक्रिय दिखाई गई है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100(1)(b) के तहत आता है, जो चुनाव को अमान्य घोषित करने के आधारों से संबंधित है.

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