गढ़ बचा न वर्चस्व रहा! पुणे और PCMC में पवार परिवार का 'क्लीन स्वीप', चाचा-भतीजे के अभेद्य किले में BJP की सेंध

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव के परिणाम ने सबको चौंका दिया. पुणे और पिंपरी चिंचवड़ जो कि पवार परिवार का गढ़ माना जाता था, वहां बीजेपी ने धमाल मचा दिया. बीजेपी ने दोनों निगमों में भारी बहुमत हासिल कर एनसीपी के दोनों गुटों को पीछे छोड़ दिया.

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पुणे-पीसीएमसी में एनसीपी का पतन (Photo: ITG) पुणे-पीसीएमसी में एनसीपी का पतन (Photo: ITG)

ओमकार

  • मुंबई,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:07 PM IST

महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के नतीजों ने पश्चिम महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह से बदल दिया है. वह क्षेत्र जो कभी अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गढ़ माना जाता था, आज बीजेपी के प्रभाव में आ गया है. इन चुनावों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की राजनीतिक पकड़ को गहरा झटका दिया है.

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पुणे नगर निगम में बीजेपी ने 165 सीटों में से 119 पर जीत दर्ज कर अभूतपूर्व बहुमत हासिल किया, जबकि पिंपरी चिंचवड़ में 128 सीटों में से 84 सीटें जीत लीं. 

यह आंकड़े दिखाते हैं कि शहरी महाराष्ट्र में एनसीपी की पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है. दो साल पहले अजित पवार के अलग गुट बनने के बाद से पार्टी की स्थिति और भी नाजुक हो गई है. हालांकि, नगर निगम चुनावों में एनसीपी और एनसीपी (एसपी) ने एकजुट होकर बीजेपी को रोकने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति कामयाब नहीं हो सकी.

पुणे में एनसीपी के पार्षदों की संख्या 43 से घटकर 27 रह गई, जबकि पिंपरी चिंचवड़ में बीजेपी ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली. अजित पवार का गुट महज 37 सीटों पर सिमट गया. 

ख़ासतौर से पुणे में यह चुनाव बीजेपी और अजित पवार के गुट के बीच सीधी टक्कर साबित हुई, जहां भीड़भाड़ वाले प्रचार और मीडिया बयानबाजी का कोई खास असर नहीं हुआ. आखिर बीजेपी की मजबूत संगठनात्मक ताकत और विकास के कामों पर केंद्रित प्रचार ने बाजी मार ली.

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स्थानीय स्तर पर यह भी साफ़ तौर से दिखा कि चुनाव बड़े नेताओं के नाम पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार के नेटवर्क और संगठन की क्षमता पर निर्भर होते हैं. बीते चुनावों में एनसीपी को उम्मीदवारों की कमी और नेतृत्व की अनुपस्थिति से भी भारी नुकसान हुआ, जबकि बीजेपी पूरी तरह सक्रिय रही.

ग्रामीण इलाकों में अजित पवार अभी भी मजबूत हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ तेजी से स्थायी बनती जा रही है. छह बड़े शहरों के 619 नगर निगम सीटों में एनसीपी को मात्र 119 सीटें मिलीं, जो पार्टी की गिरावट का साफ संकेत हैं.

यह जीत बीजेपी की शहरी विस्तार नीति की सफलता और पवार परिवार के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी का प्रभुत्व और भी बढ़ेगा.

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