महाराष्ट्र: महंगे इलाज से नाराज मरीज ने अस्पताल में रखा 'बम', ATS ने किया गिरफ्तार

पुणे एटीएस ने अस्पताल में नकली बम रखने के आरोप में शिवाजी राठौड़ को गिरफ्तार किया है. इलाज के भारी बिल से नाराज होकर आरोपी ने साजिश रची थी.

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यूपाई ट्रांजैक्शन से पुलिस को मिला सुराग (Rrepresentative Image/File) यूपाई ट्रांजैक्शन से पुलिस को मिला सुराग (Rrepresentative Image/File)

ओमकार

  • पुणे,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:16 PM IST

महाराष्ट्र में पुणे की एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने नागपुर से शिवाजी राठौड़ नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है. उस पर पुणे के हडपसर स्थित 'उषा किरण' अस्पताल में नकली बम रखकर दहशत फैलाने और ब्लैकमेल करने का आरोप है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने इलाज के भारी-भरकम बिल से नाराज होकर बदला लेने के इरादे से इस घटना को अंजाम दिया था.

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हॉस्पिटल में तब हड़कंप मच गया, जब परिसर में नकली बम बरामद किया गया. आरोपी ने कथित तौर पर इलाज के बिल से नाराज होकर अस्पताल में एक नकली बम रखा दिया था. 

आरोप है कि आर्थिक विवाद से नाराज आरोपी ने हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन पर दबाव बनाने के लिए बाथरूम में एक संदिग्ध उपकरण रख दिया. जांच में सामने आया है कि उसने धमकी देने के इरादे से नकली बम तैयार किया था.

पुलिस ने क्या कहा?

पुणे पुलिस के अमितेश कुमार का कहना हैं कि आरोपी शिवाजी राठौड़ 10 मई को एक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) के इलाज के लिए उषा किरण अस्पताल आया था. इलाज के दौरान उसे करीब 7 लाख रुपये का बिल थमाया. राठौड़ का मानना था कि अस्पताल प्रशासन उसका आर्थिक शोषण कर रहा है, जिसे लेकर उसने बदला लेने की साजिश रची थी.

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल के बाथरूम से बरामद उपकरण कोई असली विस्फोटक नहीं था. आरोपी का मकसद सिर्फ दहशत का माहौल बनाना था.

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कैसे खुला राज?

जांच में खुलासा हुआ है कि राठौड़ ने अस्पताल के बाथरूम में संदिग्ध उपकरण रखा था. उसने डिवाइस बनाने के लिए 150 रुपये का टाइमर खरीदा था. नकली जिलेटिन स्टिक्स को चिपकाने के लिए उसके पास कोई चिपकने वाला पदार्थ नहीं था, इसलिए उसने स्टेशनरी दुकान से डबल-साइडेड टेप खरीदा और उसका 15 रुपये का भुगतान UPI से किया. पुलिस ने इसी UPI ट्रांजैक्शन को ट्रेस करते हुए आरोपी के मोबाइल नंबर और पहचान तक पहुंच बनाई. फिलहाल, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

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