मेयर चुनाव: नवी मुंबई में बीजेपी और शिंदे के बीच खिंची तलवार, निर्विरोध फॉर्मूले का दांव फेल?

महाराष्ट्र में मेयर चुनाव को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है. कल्याण और उल्हासनगर में शिंदे के पास अपने दम पर नंबर गेम था, लेकिन बीजेपी को डिप्टी मेयर का पद देकर निर्विरोध चुनाव करा लिया, जिससे नवी मुंबई में दोनों के बीच सियासी तलवारें खिंच गई हैं.

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नवी मुंबई के मेयर चुनाव में बीजेपी और शिवसेना आमने-सामने (Photo-PTI) नवी मुंबई के मेयर चुनाव में बीजेपी और शिवसेना आमने-सामने (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

महाराष्ट्र के अलग-अलग नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव को लेकर सियासी तानाबाना बुना जा रहा है. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के बीच आपसी सहमति के जरिए निर्विरोध का फॉर्मूला चल रहा था, लेकिन नवी मुंबई के मेयर चुनाव में दोनों ही पार्टियों ने उम्मीदवार उतार दिए हैं. इस तरह से महायुति के बीच सियासी तलवार खिंच गई है. 

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नवी मुंबई नगर महापालिका के मेयर और डिप्टी मेयर के लिए बीजेपी और शिंदे की शिवसेना दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. इसके चलते मेयर सीट पर बीजेपी को निर्विरोध कराने के सियासी मंसूबों पर ग्रहण लग गया है. अब दोनों ही पार्टियों को अपने-अपने सियासी दांव आजमाने होंगे. ऐसे में देखना है कि नवी मुंबई के मेयर सीट पर किसका कब्जा होता है?

नवी मुंबई में बीजेपी-शिवेसना आमने-सामने
नवी मुंबई के मेयर और उपमेयर के लिए बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के बीच मुकाबला है. बीजेपी की तरफ से मेयर पद के लिए सूरज पाटिल मेयर और डिप्टी मेयर के लिए दशरथ सीताराम भगत उम्मीदवार हैं. 

वहीं, शिंदे की शिवसेना से मेयर के लिए सरोज रोहिदास पाटील और उपमेयर के लिए आकाश मढवी किस्मत आजमा रहे हैं. इस तरह से बीजेपी और शिवसेना दोनों पार्टियों की तरफ से उम्मीदवार उतर जाने के चलते 5 फरवरी को दोनों ही पदों के लिए चुनाव होगा. 

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बीजेपी के सामने शिवसेना के चुनौती
नवी मुंबई नगर निगम में कुल 111 पार्षद सीटें है. बीजेपी के 65 पार्षद जीतकर आए हैं तो शिंदे की शिवसेना के 42 पार्षद जीते हैं. इसके अलावा पांच पार्षद अन्य दलों से जीते थे. इस तरह बीजेपी के पास अपने दम पर मेयर बनाने का नंबर गेम है. बीजेपी को लग रहा था कि अपने पार्षद के दम पर निर्विरोध मेयर बना लेगी, लेकिन शिवसेना ने उसके लिए चुनौती खड़ी कर दी है.

मेयर और डिप्टी मेयर पद पर शिवसेना के उम्मीदवार के उतरने से बीजेपी का गेम गड़बड़ा गया है. बीजेपी को अब मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में शिवसेना से मुकाबला करना होगा.  हालांकि, नंबर गेम अभी भी बीजेपी के पक्ष में है, क्योंकि उसके पास बहुमत से ज्यादा पार्षद हैं. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या वजह है कि बीजेपी के सामने शिंदे ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं? 

निर्विरोध फॉर्मूले पर सहमति के भी चुनाव? 
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना ज्यादातर शहरों में एक साथ मिलकर लड़े थे, लेकिन कुछ जगहों पर एक दूसरे के खिलाफ भी किस्मत आजमाए थे. इसके बाद भी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में शिंदे और शिवसेना साथ आ गए थे. 

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उल्हासनगर में शिवसेना एकनाथ शिंदे अपने दम पर बहुमत तक पहुंच गई थी, उसके बावजूद बीजेपी को उपमहापौर का पद दे दिया था. उसी तरह कल्याण-डोंबिवली में भी शिवसेना अपने दम पर बहुमत तक पहुंच गई थी, फिर भी बीजेपी को उपमहापौर का पद दे दिया था. इस वजह से दोनों ही जगहों पर मेयर और डिप्टी मेयर के लिए निर्विरोध  चुनाव हुआ था. 

नवी मुंबई में भी उम्मीद थी कि बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके चलते अपना मेयर निर्विरोध बना लेगी. ऐसे में बीजेपी डिप्टी मेयर का पद शिंदे की शिवसेना को दे सकती है. 

नवी मुंबई में शिंदे-नाईक में खिंच गई तलवार

बीजेपी ने नवी मुंबई नगर निगम में मेयर के साथ डिप्टी मेयर पर अपने उम्मीदवार उतार दिए, जिसके लिए शिंदे गुट से चर्चा तक नहीं की गई. इसके बाद शिवेसना ने भी दोनों ही पदों पर अपने उम्मीदवारों के नामांकन पत्र भरवा दिए हैं. इसके चलते बीजेपी के निर्विरोध मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने की उम्मीदों पर ग्रहण लग गया है और उसे अब शिवसेना से दो-दो हाथ करना होगा? 

सियासी गलियारे में चर्चा है कि बीजेपी ने बड़ा दिल दिखाया होता और शिवसेना को डिप्टी मेयर पद दिया होता, तो यहां भी दोनों एकसथ आ सकते थे. नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया के बाद नवी मुंबई में शिवसेना (शिंदे गुट) के उपनेता विजय चौगुले ने कहा कि राज्य में महायुति की सरकार है, इसलिए हमने नामांकन भरा है और आगे चुनाव तक इंतजार करेंगे.

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 नवी मुंबई मनपा में महापौर की सीट सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुई. बीजेपी नेता गणेश नाईक ने अपने वफादार को महापौर का पद पर उतार रखा है. शिंदे के साथ नाईक के रिश्ते जगजाहिर हैं. ठाणे से लेकर नवी मुंबई तक शिंदे और नाईक की सियासी अदावत जगजाहिर है. यही वजह है कि बीजेपी और शिंदे की शिवसेना एक दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं. 

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