महाराष्ट्र के नासिक जिले के सिन्नर में मंदिर ट्रस्ट चलाने वाले स्वयंभू बाबा अशोक खरात की गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. 18 मार्च को एक 35 साल की महिला की ओर से दर्ज कराए गए रेप केस मामले के बाद अब खरात के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. एसआईटी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि खरात अपने दफ्तर में 'कोड लैंग्वेज' का इस्तेमाल करता था.
झूमर की लाइट और स्टाफ का इशारा
जांच में पता चला है कि जब भी बाबा खरात किसी महिला को 'शुद्धिकरण' के नाम पर केबिन के अंदर बुलाता था, तो वह कमरे के झूमर की लाइट बंद कर देता था. यह स्टाफ के लिए एक 'कोड' होता था कि अंदर यौन शोषण की प्रक्रिया चल रही है और उस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत नहीं होती थी. बाबा के केबिन में ऐसे कांच लगे थे, जिनमें बाहर से अंदर का दृश्य नहीं दिखता था, जबकि अंदर से बाहर का नजारा दिख जाता था.
SIT के पास शिकायतों का अंबार
महाराष्ट्र सरकार ने IPS तेजस्वी सातपुते की अगुवाई में एक एसआईटी बनाई है. इस टीम ने दो मोबाइल नंबर जारी किए हैं. सीनियर अधिकारियों के अनुसार, पिछले 5 दिनों में 50 से ज्यादा कॉल आए हैं जिनमें लोगों ने खरात के काले कारनामों की जानकारी दी है. औसतन प्रतिदिन 15 से 20 कॉल जांच टीम को मिल रहे हैं. एसआईटी ने आश्वासन दिया है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.
हथियार लाइसेंस सस्पेंड और छापेमारी
नासिक के कलेक्टर आयुष प्रसाद ने नैतिक पतन को आधार मानते हुए अशोक खरात का रिवॉल्वर लाइसेंस निलंबित कर दिया है. प्रशासन का मानना है कि खरात अपने हथियारों का इस्तेमाल पीड़ितों को डराने-धमकाने के लिए कर सकता था. वहीं, शुक्रवार को फोरेंसिक टीम के साथ एसआईटी ने खरात के दफ्तर से फाइलें, दस्तावेज और एक डायरी बरामद की है, जिससे कई बड़े नामों के खुलासे होने की उम्मीद है.
पहचान उजागर करने वालों पर भी गाज
पुलिस ने सिर्फ खरात ही नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं की पहचान सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से उजागर करने वाले राहुल शिंदे और योगेश अधव को भी गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने साफ किया है कि पीड़ितों की निजता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
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