बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई पुलिस को एक अंतरधार्मिक विवाहित जोड़े को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है. उन्हें आशंका थी कि गुजरात पुलिस महिला को ले जाएगी. कोर्ट ने पुरुष और महिला से व्यक्तिगत रूप से बात करने के बाद यह आदेश पारित किया. महिला ने कोर्ट को बताया कि उसने अपनी मर्जी से उस व्यक्ति से विवाह किया है, जो पहले से ही तीन बच्चों का पिता और विवाहित है.
दरअसल, न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ जोड़े द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ताओं को 24 घंटे और सातों दिन दो हथियारबंद गार्ड दिए जाएं, जो 8 अगस्त 2024 तक याचिकाकर्ताओं के साथ रहेंगे. चाहे वे कहीं भी जाएं. पीठ ने अहमदाबाद के नारोल पुलिस स्टेशन को भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की सुनवाई होने तक उनके खिलाफ कोई भी कदम न उठाया जाए.
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बता दें कि पुरुष मुंबई का रहने वाला है, जबकि महिला मुस्लिम रीति-रिवाजों के तहत शादी करने के लिए अहमदाबाद से अपना घर छोड़कर गई थी. हालांकि, उसके घर से जाने के बाद उसके परिवार ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी. फिर उसके भाई ने महिला के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कराया, जिसमें कहा गया कि वह 4 लाख 50 हजार रुपये के सोने के आभूषण और 50 हजार रुपये नकद लेकर भाग गई है.
महिला के माता-पिता और भाई भी कोर्ट में थे मौजूद
दंपति की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एमएल कोचरेकर और मोहम्मद अहमद शेख ने कहा कि चोरी का मामला बाद में दर्ज किया गया, क्योंकि यह मामला दंपत्ति द्वारा सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बाद दर्ज किया गया था. 24 वर्षीय महिला के माता-पिता और भाई भी गुजरात पुलिस के साथ अदालत में मौजूद थे.
महिला ने पीठ को बताया कि 15 जुलाई 2024 को जब वह घर से भागी थी तब उसने कुछ भी नहीं चुराया था. उसने कहा कि वह अपने माता-पिता को पहने हुए सोने की चेन और झुमके भी सौंपने के लिए भी तैयार हैं. हालांकि, उसने कुछ दिनों के लिए भी अपने माता-पिता के घर वापस जाने से इनकार कर दिया और यहां तक कि अपने माता-पिता से मिलने से भी इनकार कर दिया.
महिला 6 सालों से को जानती थी शख्स को
महिला पिछले छह सालों से उस व्यक्ति (जिससे शादी की) को जानती थी, क्योंकि वह उसके मामा के साथ एक फर्म में भागीदार था. उसने लड़की से कहा कि वह जानती है कि वह एक शादीशुदा व्यक्ति है और उसके तीन बच्चे हैं. इसके बावजूद उसने शादी करने का फैसला किया. न्यायाधीशों ने सभी संबंधित पक्षों से व्यक्तिगत रूप से और साथ में बातचीत की. पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता और उसके माता-पिता के बीच दुश्मनी है. इसलिए, किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पीठ ने मुंबई पुलिस को जोड़े को तुरंत पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया.
अहमदाबाद के नारोल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों जो अदालत में थे, पीठ को सूचित किया कि वे केवल जोड़े के बयान दर्ज करने के लिए मुंबई आए थे. उन्हें गुजरात वापस ले जाने का कोई इरादा नहीं था. पीठ ने निर्देश दिया कि वे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं या मुंबई में वीबी नगर पुलिस स्टेशन को सूचित कर सकते हैं. फिर जोड़े के बयान दर्ज कर सकते हैं.
विद्या