'मैं भी मुंबई चॉल का प्रोडक्ट हूं, आज 6 लाख करोड़ मैनेज करता हूं', मुंबई मंथन में बोले दिग्गज बिजनेसमैन

मुंबई मंथन कार्यक्रम में बिजनेसमैन नीलेश शाह ने कहा कि आज का जो बिजनेसमैन है वो कलियुग का अभिमन्यु है. अभिमन्यु सिर्फ कौरवों से लड़ रहा था, हमारा अभिमन्यु कौरव-पांडव दोनों से लड़ता रहता है. उन्होंने कहा कि आज अगर आपके पास आइडिया है तो पूंजी की कमी नहीं है.

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उद्योगपति नीलेश शाह ने कहा कि आरक्षण एंट्री लेवल पर ही दिया जाना चाहिए. (Photo: ITG) उद्योगपति नीलेश शाह ने कहा कि आरक्षण एंट्री लेवल पर ही दिया जाना चाहिए. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

उद्योगपति और इनविजिन कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने कहा है कि मुंबई में जो भी आता है, सफल हो जाता है. दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई भी विकसित हो रहे हैं, लेकिन मुंबई में सबसे अच्छी बात यह है कि मुंबई की प्राकृतिक बसावट समुद्र के किनारे हैं. इसका लोगों ने फायदा उठाया. यहां मेरिट के आधार पर मौका मिलता है. दिल्ली में कई बार लोग कहते हैं कि तू जानता नहीं मैं कौन हूं. लेकिन मुंबई में ऐसा कल्चर नहीं है. शायद इसलिए मुंबई विकसित हो रहा है.

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उन्होंने कहा कि पैसा, पैसा बनाता तो है. लेकिन ऐसा नियम नहीं है. अगर ऐसा होता तो अमीर आदमी गरीब नहीं होता और गरीब आदमी अमीर नहीं होता. अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह भी मुंबई के चॉल के प्रोडक्ट हैं और आज 6 लाख करोड़ रुपये मैनेज कर रहे हैं.

रिजर्वेशन पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण भी जरूरी है, क्योंकि पिछड़े वर्ग को आगे लाना है, लेकिन आरक्षण एंट्री के समय होना चाहिए, उसके बाद मेरिट के आधार पर काम होना चाहिए. दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जिन्होंने सिर्फ आरक्षण के आधार पर विकास हासिल किया है. पिछड़ों को हम छोड़ नहीं सकते लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि मेरिटोक्रेसी के आधार पर लोगों का चुनाव हो. जब हम किसी को रिक्रूट करते हैं तो उसका वैल्यूज और कल्चर को देखते हैं, ये फिट हो गई तो बाकी चीजें सिखा देते हैं. 

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सिंगापुर विकास के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिंगापुर के राष्ट्रपिता ली क्वान यू के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी और वे सिंगापुर को बंबई से जैसा बनाना चाहते थे, लेकिन सिंगापुर आज हमसे बहुत आगे है ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सिंगापुर छोटा सा राज्य है और उसे मैनेज करना आसान है. मुंबई भारत ही नहीं पूरे भारत का वजन उठाता है. उन्होंने कहा कि देश में 700 से ज्यादा जिले हैं इनमें से 13 जिले जिनमें मुंबई भी शामिल है, आधे भारत का जीडीपी प्रोड्यूस करते हैं, बाकी के जिले आधा जीडीपी पैदा करते हैं. मुंबई को अपने साथ साथ महाराष्ट्र और भारत का भी ख्याल रखना पड़ता है. 

नीलेश शाह ने विकसित मुंबई, बदलती मुंबई कार्यक्रम में कहा कि मुंबई में कमियां हैं, ऐसा नहीं है कि हमारी मुंबई परफेक्ट है. प्रदूषण की समस्या आने लगी है, ट्रैफिक की दिक्कत है. लेकिन ये चीजें सिर्फ सरकार दूर नहीं कर सकती है. हमें सिविक सेंस विकसित करना होगा. गांधीजी ने कहा था जो बदलाव हम दूसरों में देखना चाहते हैं वो खुद अपनाना होगा. तब बदलाव होगा. 

बिजनेसमैन कम्युनिटी के बारे में नीलेश शाह ने कहा कि आज का जो बिजनेसमैन है वो कलियुग का अभिमन्यु है. अभिमन्यु सिर्फ कौरवों से लड़ रहा था, हमारा अभिमन्यु कौरव-पांडव दोनों से लड़ता रहता है. एक उदाहरण के जरिये उन्होंने कहा कि आज से 11 साल पहले सभी कारों पर एक काली फिल्म होती थी जो धूप से हमें बचाता था. एसी का भार कम करती थी. इसे भारत की एक कंपनी बनाती थी. लेकिन कुछ लोग कोर्ट चले गए और फिर सारे देश की ट्रैफिक पुलिस उस काली फिल्म को हटाने में जुट गई. आज वो कंपनी 56 देशों में उस फिल्म का निर्यात करती है. वहां का ईंधन बचाती हैं, पर्यावरण की रक्षा करती है. ये प्रोडक्ट 56 देशों में लोगों की मदद करती है. 

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उन्होंने कहा कि GST निश्चित रूप से एक रिफॉर्म है, भारत अब चौथी बड़ी इकोनॉमी है. हमने कभी इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाई.

 नीलेश शाह ने कहा कि भारत सही दिशा में जा रहा है. लेकिन कुछ और करने की जरूरत है. हमारे देश में आज भी इंस्पेक्टर राज बना हुआ है. इसे खत्म करना पड़ेगा. ताकि हमारा बिजनेसमैन सिर्फ बिजनेस करे कम्पलायंस में जुटा नहीं रहे. 

टैरिफ पर उन्होंने कहा कि अबतक हमारा जो एक्सपोर्ट हुआ है अमेरिका में, अक्टूबर और नंवबर में उसमें गिरावट नहीं आई. लेकिन ऐसा एप्पल की वजह हुआ है. टेक्सटाइल्स, हैंडीक्राफ्ट, ज्वैलरी पर असर पड़ा है. सरकार कदम उठा रही है. भारत आज भी सबसे तेज बढ़ने वाली इकोनॉमी है. हम वो स्टूडेंट है जो 100 नंबर में 60 पाकर फर्स्ट होकर खुश हो जाते हैं. 100 नहीं लाना चाहते हैं. 

नीलेश शाह ने कहा कि पैसा पैसा को खीचते हैं, लेकिन यही रूल नहीं है. नहीं तो गरीब अमीर नहीं होता और अमीर गरीब नहीं होता. मैं भी मुंबई चॉल का प्रोडक्ट हूं, स्कॉलरशिप पर पढ़ा हूं और आज 6 लाख करोड़ मैनेज करता हूं. हमारे समय में प्राइवेट कैपिटल नहीं थी. लेकिन आज अगर आपके पास बिजनेस आइडिया है तो आप भी वैसा बन सकते हैं. आज पूंजी की कमी नही है. आपके पास परपस, पैशन, आइडिया और क्रिएटिवी चाहिए, वो आप भाड़े पर नहीं ला सकते. 

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