मेंटेनेंस के मामलों पर 60 दिनों के भीतर हो फैसला, इस मांग को लेकर दाखिल होगी PIL

इस कार्यक्रम में ऐसे मामलों पर बातचीत की गई, जिनमें कुछ महिलाएं कानून का गलत इस्तेमाल करके अपने पति, सास, ससुर और उनके घरवालों को परेशान करती हैं. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व जज पुष्पा गनेडीवाला मौजूद थीं.

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कार्यक्रम के दौरान कई पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई कार्यक्रम के दौरान कई पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 16 मई 2024,
  • अपडेटेड 2:10 AM IST

मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में ऐसे पुरुषों की समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया, जो अपनी पत्नियों से पीड़ित हैं. मैन की बात (Man ki Baat) नाम के इस कार्यक्रम में ऐसे मामलों पर बातचीत की गई, जिनमें कुछ महिलाएं कानून का गलत इस्तेमाल करके अपने पति, सास, ससुर और उनके घरवालों को परेशान करती हैं. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व जज पुष्पा गनेडीवाला मौजूद थीं.

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बच्चों पर पड़ता है बुरा असर
इसके अलावा इस कार्यक्रम में इस बात पर भी चिंता जाहिर की गई कि पति-पत्नी के झगड़े से उनके बच्चों पर कितना बुरा असर पड़ता है. वो चाहे अपने पिता के साथ रहें, या फिर मां के साथ.. वो हमेशा अधूरा महसूस करते हैं. कई मामलों में बच्चे जिस अभिभावक के साथ रहते हैं, वो उन्हें दूसरे अभिभावक के खिलाफ भड़काते हैं और बच्चों को उनसे दूर कर देते हैं. ऐसा करना बच्चों के लिए ठीक नहीं होता. 

बेटी ने सुनाई आपबीती
इस कार्यक्रम के दौरान एक ऐसी बेटी भी मौजूद थी. जिसे उसकी मां ने अपने पिता से 22 साल तक दूर रखा. वो महिला अपनी बेटी को लगातार उसके पिता के बारे में नकारात्मक बातें बताया करती थी, लेकिन बड़े होने पर उसे सारा माजरा समझ आने लगा. क्योंकि उसके पिता अक्सर उसे उपहार भेजा करते थे. उसकी शिक्षा और दूसरी ज़रूरतों को ख्याल रखते थे. इसके बाद उस बेटी ने अपने पिता से मिलने के फैसला किया. कार्यक्रम मौजूद लोगों ने उस बेटी के इस सार्थक कदम की प्रशंसा की.

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मांग को लेकर PIL
क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के सभागार में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम के विषय में दिल्ली से आए एडवोकेट मनीष ने बताया कि यह कार्यक्रम न्याय प्रयास फॉउन्डेशन की ओर से आयोजित किया गया था. उन्होंने बताया कि पति से विवाद के बाद अधिकांश महिलाएं मेंटेनेंस केस करती हैं. इस कानून के वे सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं. इस कार्यक्रम के दौरान फैसला लिया गया है कि इस संबंध में एक पीआईएल दाखिल की जाएगी. जिसके अनुसार, आय के हलफनामे को केस के साथ पेश करने और मेंटेनेंस के मामलों में 60 दिनों के भीतर फैसला दिए जाने की बात की जाएगी. 

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