25000 करोड़ के MSCB घोटाले में बड़ा फैसला, रोहित पवार समेत सभी आरोपी बरी

महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में कोर्ट ने NCP नेता रोहित पवार समेत सभी आरोपियों को ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में बरी कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि जब मूल अपराध ही नहीं बचा, तो PMLA के तहत मामला नहीं टिकता.

Advertisement
क्लोजर रिपोर्ट का असर, PMLA केस नहीं टिक सका, अदालत ने सुना दिया अपना फैसला. (File Photo: ITG) क्लोजर रिपोर्ट का असर, PMLA केस नहीं टिक सका, अदालत ने सुना दिया अपना फैसला. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:27 PM IST

मुंबई में MPs/MLAs कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) से जुड़े 25000 करोड़ रुपए के घोटाले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में NCP विधायक रोहित पवार समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने अपने फैसले में कहा कि मूल अपराध के अभाव में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला टिक ही नहीं सकता. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब किसी सक्षम अदालत द्वारा मूल अपराध में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली जाती है, तो उसे बरी माना जाता है.

Advertisement

दरअसल, ED का यह मामला अगस्त 2019 में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज FIR से जुड़ा था. इसमें आरोप था कि MSCB के तत्कालीन अधिकारियों और निदेशकों ने नियमों का पालन किए बिना सहकारी चीनी मिलों को बेहद कम कीमतों पर बेच दिया.

हालांकि, हाल ही में MP/MLA कोर्ट ने इस FIR में EOW द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था. इसी आधार पर आरोपियों ने ED केस से भी राहत की मांग की थी. फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय का हवाला देते हुए जज ने अहम बात कही है.

उन्होंने कहा कि PMLA के तहत कोई भी कार्रवाई तभी संभव है, जब कोई मूल अपराध मौजूद हो. PMLA का हर केस किसी पूर्व अपराध पर आधारित होता है. ED ने अदालत में इन याचिकाओं का विरोध किया. एजेंसी ने कहा कि 2021 में दाखिल रिट याचिका अभी बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित है.

Advertisement

ED ने अदालत से यह भी आग्रह किया था कि वह मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तथ्यों के आधार पर ही बरी करने के आवेदन पर फैसला करे. हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि हाई कोर्ट ED के पक्ष में कोई आदेश देता है, तो वो कार्यवाही को फिर से शुरू कर सकती है.

कोर्ट ने कहा, ''वर्तमान में किसी शिकायत के अस्तित्व में न होने के कारण, PMLA के तहत केस चलाना कानूनी रूप से अस्थिर है.'' यह घोटाला सहकारी बैंकों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए सहकारी चीनी मिलों, कताई मिलों और अन्य संस्थाओं को दिए गए ऋण से जुड़ा था. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement