'दुविधा छोड़िए, भारत विश्व गुरु बनेगा', नागपुर में मोहन भागवत का बड़ा बयान; राम मंदिर के संघर्ष का दिया हवाला

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के भविष्य और 'विश्व गुरु' बनने के संकल्प पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने समाज को 'होगा या नहीं' वाली दुविधा से बाहर निकलकर विश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया.

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नागपुर में भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास पर मोहन भागवत का संबोधन.(Photo:Screengrab) नागपुर में भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास पर मोहन भागवत का संबोधन.(Photo:Screengrab)

योगेश पांडे

  • नागपुर,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:39 PM IST

नागपुर में भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने जनता को संबोधित करते हुए भारत के विश्व गुरु बनने पर गहरा विश्वास व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि आज भले ही दुनिया और हमारी अपनी परिस्थितियां ऐसी लगें कि मन में शंका पैदा हो, लेकिन भारत का विश्व गुरु बनना 'अनिवार्य' है.

मोहन भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा, ''राम मंदिर आंदोलन के निर्माण को लेकर 30 साल तक दुविधा बनी रही. मुझसे लोग पूछते थे कि कैसे होगा? तो मैं कहता था कि होगा, लेकिन कैसे होगा? वो मुझे पता नहीं. मैं कह देता था कि भाऊराव देवरस जी ने कहा है 20 या 30 साल में हो जाएगा. अगर नहीं हुआ तो 30 साल के बाद पूछना, उसके पहले मत पूछो. मैंने एक भरोसा मन में पैदा कर लिया था. और 2010 में 20 साल के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय आया, और फिर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया. इससे यह पता चलता है कि जो अनिवार्य है, वह होकर रहता है.''
 
दुनिया की हालत और भारत का रास्ता
सरसंघचालक ने वैश्विक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा, ''आज दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें भारत का विचार और रास्ता ही एकमात्र विकल्प है. अगर भारत का रास्ता दुनिया ने  नहीं अपनाया तो भविष्य है क्या?''

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उन्होंने आगे कहा कि 'क्या होगा और कैसे होगा' की दुविधा में न पड़ें. यानी जो अनिवार्य है उसके बारे में शंका मत रखना. हमें बस अपना कर्तव्य निभाते हुए एक-एक कदम आगे बढ़ाना है. देखें VIDEO:- 

आत्मविश्वास और पक्की अवस्था
RSS चीफ भागवत ने स्वीकार किया कि अभी हमारी अवस्था पक्की होनी बाकी है और प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में भारत का उत्थान कोई रोक नहीं सकता, क्योंकि दुनिया को अब भारत की आवश्यकता है.

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