महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति का शहर से गांव तक सियासी कब्जा कायम गया है. नगर निकाय के बाद महानगरपालिका और अब जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. सूबे में 2024 के विधानसभा चुनाव से महायुति का लगातार प्रदर्शन जारी है.
महाराष्ट्र के जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावी नतीजे सोमवार को आए हैं. 12 जिला परिषदों की 731 सीटों महायुति ने 552 सीटें जीती है जबकि महाविकास अघाड़ी 124 सीटें जीत सकीं है. 125 पंचायत समीति के 1462 सीटों में से महायुति ने 1067 सीटें जीती हैं तो महाविकास अघाड़ी सिर्फ 232 सीटें ही जीत सकी हैं.
महायुति का जिला परिषद में करीब 80 फीसदी स्ट्राइक रेट रहा तो महाविकास अघाड़ी का 18 फीसदी रहा. पंचायत समिति के चुनाव में भी महायुति के जीत का स्ट्राइक रेट 70 फीसदी तो महाविकास अघाड़ी का 20 फीसदी स्ट्राइक रेट है. जिला परिषद और पंचायत समिति दोनों ही चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो अजित पवार की एनसीपी दूसरे नंबर पर रही है.
जिला परिषद में कौन कितनी सीटें जीती
महाराष्ट्र के 12 जिला परिषद की 731 सीटों में से महायुति ने 552 सीट पर जीत दर्ज की है. बीजेपी 225 जिला परिषद सदस्य की सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी के बाद अजित पवार के अगुवाई वाली एनसीपी 165 सीटें जीती हैं तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना 162 सीट जीत सकी हैं.
वहीं, जिला परिषद में विपक्षी पार्टियों का सफाया हो गया. कांग्रेस ने 55 जिला परिषद सीटें जीती तो उद्धव ठाकरे के अगुवाई वाली शिवसेना को 43 सीटें मिली हैं और शरद पवार की एनसीपी 26 सीटें ही जीत सकी हैं. राज ठाकरे के पार्टी एमएनएस ने दो सीटें जीती हैं तो 27 जिला परिषद सीटें निर्दलीय और अन्य पार्टियां जीतने में सफल रही हैं.
पंचायत समिति में कौन कितनी सीटें जीती
प्रदेश की 125 पंचायत समिति की 1462 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिसमें से एक हजार से ज्यादा सीटें महायुति जीतने में सफल रही है. महायुति ने करीब 1067 पंचायत सीटें जीती हैं, जिसमें बीजेपी ने 459 सीट जीतीं, इसके बाद अजित पवार की पार्टी एनसीपी ने 306 और शिंदे की शिवसेना को 302 पंचायत समिति सीटें जीती हैं.
वहीं, महाविकास अघाड़ी की तीनों दलों की सीटें ढाई सौ तक नहीं पहुंच सकी. महाविकास अघाड़ी ने 232 पंचायत समिति की सीटें जीतने में सफल रही है. इसमें कांग्रेस 97, शपद पवार की एनसीपी 46 और उद्धव ठाकरे की एनसीपी 89 सीटें जीतने में सफल रही हैं. इसके अलावा राज ठाकरे एमएनएस ने दो, निर्दलीयों ने 31 और अन्य दलों ने 53 सीटें जीतने में सफल रही.
राज्य के किस जिले में किसका होगा कब्जा
महाराष्ट्र के 12 जिलों में जिला परिषद के चुनाव हुए हैं. रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर शामिल हैं. कोल्हापुर और लातूर जिले में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो बाकी के 10 जिलों में महायुति का पलड़ा भारी है.
बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ मिलाकर 5 जिलों में अपना कब्जा जमाने की स्थिति में है तो अजित पवार की एनसीपी तीन जिले और शिंदे की शिवेसना दो जिलों में अपना अध्यक्ष बना लेगी. शिंदे की शिवसेना रायगढ़ और रत्नागिरी में सबसे बड़ी पार्टी है तो अजित पवार की एनसीपी पुणे, सतारा और कोल्हापुर में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं.
शहर से गांव तक महायुति का कब्जा
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति ने जीत का सिलसिला शुरू किया, उसे वो बरकरार रखे हुए है. नगर निकाय और महानगरपालिका के बाद जिला परिषद व पंचायत समिति में महायुति का दो तिहाई सीटें जीतना अपने आपमें बड़ी उपलब्धि है.
बीजेपी महाराष्ट्र के सियासी रण में जिस तरह शहर से लेकर गांव तक अपनी सियासी जड़े जमाने में कामयाब रही है, वो कांग्रेस से लेकर शरद पवार की एनसीपी के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर सकती है. जिला परिषद चुनाव नतीजे के बाद पीएम मोदी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति जीत की बधाई थी और इसे 'सुशासन' के पक्ष में वोट बताया.पीएम ने कहा कि नगर निगम और नगरपालिका परिषद चुनाव में बीजेपी और महायुति की शानदार सफलता के बाद, महाराष्ट्र के लोगों ने हमें जिला परिषद चुनाव में भी मजबूत जनादेश दिया.
गांव में भी मजबूत होती बीजेपी
महाराष्ट्र के जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के नतीजे से राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है. एक बार फिर बीजेपी सबसे अधिक सीटें जीतकर यह साबित कर दिया है कि राजनीति की धुरी फिलहाल उसी के इर्द-गिर्द घूम रही. भाजपा ने ग्रामीण महाराष्ट्र में भी अपना दबदबा कायम रखा है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की जोड़ी हिट रही. सशक्त, जमीनी और अनुशासित रणनीति के दम पर भाजपा ने राज्य में जीत की एक अनोखी हैट्रिक दर्ज की है. नवंबर में हुए नगर परिषद चुनाव, जनवरी में संपन्न महानगरपालिका चुनाव और अब फरवरी में जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव इन तीनों चुनावों में बीजेपी ने जिस तरह से जीत दर्ज की है, उसके सियासी मायने साफ है.
चुनावी नतीजों ने यह साफ किया है कि शहरी इलाके ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में बीजेपी का संगठन और कैडर मजबूत है.अजित पवार की एनसीपी और शिंदे की शिवसेना ने महायुति के भीतर अपनी ताकत साबित की है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य सरकार की योजनाएं जैसे लाड़की बहिन योजना, बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों ने ग्रामीण मतदाताओं पर असर डाला है.
कांग्रेस और शरद पवार के लिए मुश्किलें
महाराष्ट्र में बीजेपी ने यह धारणा तोड़ी कि वह सिर्फ शहरी पार्टी है. इस बार के नतीजे बताते हैं कि हमने ग्रामीण महाराष्ट्र में भी मजबूत पकड़ बनाई है. महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके में कांग्रेस और एनसीपी मजबूत रही है, लेकिन यह सियासी जमीन भी अब खिसकती नजर आ रही है. कांग्रेस के लिए जिला परिषद के चुनाव हारना किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
शरद पवार के एनसीपी का जिला परिषद में सिर्फ 26 सीटें मिलना बता रहा है कि उनके पारंपरिक ग्रामीण जनाधार में गिरावट का संकेत देता है.अजित पवार की एनसीपी का 165 सीटें जीतकर यह संदेश भी दिया कि उसका सियासी जनाधार मजबूत है और बीजेपी के बाद दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है.
कुबूल अहमद