महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने देश के अब तक के सबसे बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़ित को 2 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाई है. यह राशि 58.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पहली किस्त के तौर पर कोर्ट के आदेश के बाद रिफंड कराई गई है. पीड़ित 72 साल के बुजुर्ग मुंबई के रहने वाले हैं, जिन्हें साइबर अपराधियों ने महीनों तक डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बनाया था.
एजेंसी के अनुसार, ठगों ने खुद को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर पीड़ित और उनकी पत्नी से संपर्क किया. उन्हें कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेनदेन के मामले में फंसाने की धमकी दी गई. इसके बाद दंपति को करीब दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया, यानी वीडियो कॉल और फोन के जरिए लगातार निगरानी और डर का माहौल बनाया गया.
इस दौरान ठगों ने अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराने के लिए दबाव डाला, जिससे कुल 58.13 करोड़ रुपये की ठगी हो गई. जब दंपति को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने महाराष्ट्र साइबर पुलिस से संपर्क किया.
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राज्य पुलिस की साइबर टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की. अधिकारियों ने कई बैंक खातों और आरोपियों की संपत्तियों को फ्रीज कराया. लगातार कानूनी प्रयासों और कोर्ट के आदेश के बाद 2 करोड़ रुपये की राशि पीड़ित को वापस दिलाई गई.
पुलिस का कहना है कि यह केवल पहली किस्त है और आगे भी फ्रीज की गई संपत्तियों और खातों के जरिए और रकम रिकवर करने की कोशिश जारी है.
फरार आरोपी पर इनाम
इस मामले में देवेंद्र सैनी को मुख्य ऑपरेशनल हैंडलर बताया गया है, जो अब भी फरार है. महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 3 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है. पुलिस का मानना है कि सैनी की गिरफ्तारी से इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं.
साइबर पुलिस की अपील
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती. यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर पैसे की मांग करे या डराने की कोशिश करे, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.
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