'मुंबई मा जलेबी ने फाफड़ा' कार्यक्रम के बहाने गुजराती समुदाय पर शिवसेना की नजर

मुंबई में ज्यादातर गुजराती समाज बीजेपी का कोर वोटबैंक माना जाता है, जिसे साधने के लिए शिवसेना ने अब गुजराती कार्ड खेला है. शिवसेना गुजरातियों को लुभाने  के लिए 'मुंबई मा जलेबी ने फाफड़ा उद्धव ठाकरे आपडा' कार्यक्रम का आयोजन कर रही है.

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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे

पंकज उपाध्याय

  • मुंबई ,
  • 05 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST
  • मुंबई में बीएमसी चुनाव की तैयारी अभी से शुरू हो गईं
  • शिवसेना की नजर बीजेपी के कोर वोटबैंक पर टिकी है
  • गुजराती समाज मुंबई की कई सीटों पर असर रखता है

मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव भले ही 2023 में होने हो, लेकिन राजनीतिक दल अपने सियासी समीकरण बनाने शुरू कर दिए हैं. मुंबई में ज्यादातर गुजराती समाज बीजेपी का कोर वोटबैंक माना जाता है, जिसे साधने के लिए शिवसेना ने अब गुजराती कार्ड खेला है. शिवसेना गुजरातियों को लुभाने  के लिए 'मुंबई मा जलेबी ने फाफड़ा उद्धव ठाकरे आपडा' का आयोजन कर रही है. 

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गुजराती भाषियों को जोड़ने के लिए शिवसेना नेता हेमराज भाई शाह के नेतृत्व में शिवसेना 10 जनवरी को 'मुंबई मा जलेबी ने फाफड़ा उद्धव ठाकरे आपडा' का अयोजन मुंबई के जोगेश्वरी में कर रही है. माना जा रहा है कि शिवसेना ने इस अयोजना के जरिए बीजेपी के कोर वोटबैंक को अपना पाले में करने का दांव चला है. 

दरअसल, मुंबई शहर में गुजराती वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण है, जो बीएमसी के चुनाव में बड़ी संख्या में सीटों पर प्रभाव पैदा करने की क्षमता रखता है. इसलिए, इस महत्वपूर्ण वोट बैंक के बीच शिवसेना अपना सियासी आधार मजबूत करना चाहती है. हालांकि, शिवसेना का कहना है कि आगामी चुनावों से पहले गुजराती मतदाताओं में जागरूकता पैदा करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. शिवसेना की ओर से जारी किए गए अभियान पत्र में कहा गया है कि बीएमसी में चुनाव बिल्कुल अलग माहौल में होंगे. 

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मुंबई में गुजराती बीजेपी के परंपरागत वोटर रहे हैं और शिवसेना के साथ इस समुदाय के संबंध कुछ खास नहीं रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव  दोनों साथ लड़े थे. विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद शिवसेना ने बीजेपी से नाता तोड़कर एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली. ऐसे में अब शिवसेना की नजर बीजेपी के वोटबैंक को अपने पाले में करना है. 

आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 35 लाख लोग गुजराती समुदाय के हैं जिसमें से 15 लाख लोग वोटर हैं जो 40 सीटों पर निर्णायक भूमिका में रहते हैं. बीजेपी और शिवसेना गठबंधन टूटने के बाद मराठी और गुजराती समुदाय में ध्रुवीकरण का शिवसेना को डर सता रहै है. ऐसे में शिवसेना का गुजराती समुदाय को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है. यही वजह है कि शिवसेना मराठी के साथ-साथ गुजराती समुदाय को भी साधकर रखना चाहती है. 

वहीं, भाजपा नेता राम कदम ने कोरोना महामारी से निपटने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा. राम कदम ने कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र ने अधिकतम कोरोना मामलों को देखा. कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें भी मुंबई और महाराष्ट्र ने देखी है. संपूर्ण राष्ट्र इस बात का गवाह था कि कैसे लोगों ने अपनी जान गंवाई. महाराष्ट्र के सीएम ने घोषणा की थी कि वह एक बड़ा पैकेज देंगे लेकिन पैकेज कब देंगे. क्या यह एक वास्तविक घोषणा थी. 

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उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को इस बात की भी परवाह नहीं थी कि लोगों का समय कैसे बिता होगा. नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए खाद्यान्न लोगों को देर से भेजे गए. महाराष्ट्र में तूफान आए, फिर भी किसानों को कोई राहत नहीं मिली. हम पूछना चाहते हैं कि कोरोना पैकेज कहां है. क्या महाराष्ट्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन के लिए भी भुगतान करना होगा. क्या राज्य सरकार मदद करेगी या मुफ्त में प्रदान करेंगे. ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सरकार को देना होगा. 

 

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