'आग का गोला बना अजित दादा का विमान, हमने कंबल से ढके शवों के टुकड़े', चश्मदीद महिला ने बयां किया बारामती क्रैश का खौफनाक मंजर

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार के विमान हादसे की चश्मदीद गवाही ने दिल दहला दिया है. बारामती हवाई अड्डे के पास रहने वाले स्थानीय लोगों ने अपनी आंखों से 'दादा' के विमान को आग के गोले में तब्दील होते और शरीर के चिथड़े उड़ते देखे.

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चश्मदीद ने बयां किया बारामती क्रैश का खौफनाक मंजर.(Photo:ITG/PTI) चश्मदीद ने बयां किया बारामती क्रैश का खौफनाक मंजर.(Photo:ITG/PTI)

ओमकार

  • बारामती,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

महाराष्ट्र के बारामती में विमान हादसे को अपनी आंखों से देखने वाली महिला चश्मदीद सामने आई है. मौके पर मौजूद महिला ने हादसे का खौफनाक मंजर बयां किया. इस हादसे में प्रदेश के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हो गई.

चश्मदीद महिला ने बताया कि बुधवार सुबह विमान पहली बार घर के ऊपर से गया, तब सब ठीक था. लेकिन जब वह दोबारा लौटा, तो बहुत नीचे था. वह रनवे तक पहुंच ही नहीं पाया और सीधा गिरकर फट गया. 

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महिला ने आगे बताया, "हम अपनी भैंसों के पास थे. धमाका और आग की लपटें इतना भयानक थीं कि हम बाल्टियों में पानी लेकर दौड़े. वहां लाशें बिखरी हुई पड़ी थीं. एक शव का सिर कटा हुआ एक तरफ पड़ा था, वह आधी बॉडी थी. 

हम बहुत डर गए थे, लेकिन फिर भी हमने कंबल और कपड़े लिए और उन बिखरे हुए शवों को ढंका. पुलिस के आने में 15-20 मिनट लगे, तब तक हम वहां पानी और कपड़े लेकर खड़े रहे." 

अजित पवार: बारामती के 'दादा' का सियासी सफर
22 जुलाई 1959 को अजित पवार का जन्म अहमदनगर में उनके दादा के यहां हुआ था. वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं.

अजित ने 1982 में राजनीति में प्रवेश किया और कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में चुने हुए. वह पुणे जिला कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन भी रहे और 16 साल तक इसी पद रहे. इसी दौरान वह बारामती से लोकसभा सांसद भी निर्वाचित हुए. बाद में उन्होंने शरद पवार के लिए यह सीट खाली कर दी थी. बारामती सीट पवार की खानदानी सीट है. इस सीट पर शरद पवार और अजित पवार का ही बोलबाला रहा.

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1967 से 1990 तक शरद पवार यहां से विधायक रहे. इसके बाद 1991 से अब तक 8 बार अजित पवार यहां से विधायक चुने गए. दोनों ने मिलाकर 8 बार कांग्रेस और 4 बार एनसीपी के झंडे से जीत हासिल की. शिवसेना या बीजेपी से कभी कोई इस सीट पर जीत हासिल नहीं सका.

महाराष्ट्र में 2010 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में अजित पवार पहली बार उप मुख्यमंत्री नियुक्त हुए. अपने चाहने वालों और जनता के बीच वह दादा के रूप में लोकप्रिय हैं.

सितंबर 2012 में एक घोटाले के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि, एनसीपी ने एक श्वेत पत्र जारी करते हुए अजित पवार को क्लीन चिट दे दी थी और उप मुख्यमंत्री कार्यकाल जारी किया.

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