महाराष्ट्र के अकोला जिले से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने झकझोर कर रख दिया. यहां एक कथित बाबा बच्चों के इलाज के नाम पर खतरनाक और अमानवीय हरकतें करता था. कभी उन्हें दांतों से उठाता, तो कभी कीलों पर बैठाता. हैरानी की बात यह है कि यह सब लंबे समय से चल रहा था, लेकिन सच तब सामने आया, जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.
वायरल रील के बाद भोंदू बाबा के खिलाफ एक्शन शुरू हो गया. पुलिस ने चेतन उर्फ गुलाल शेष बाबा पर बच्चों के साथ क्रूरता, अंधविश्वास फैलाने और खतरनाक कृत्य करने की गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है.
जांच में सामने आया है कि बाबा हर सोमवार और खास मौकों पर दरबार लगाकर लोगों को चमत्कार के नाम पर गुमराह करता था. बच्चों पर खतरनाक प्रयोग करता था. वहीं, पुलिस ने अन्य संदिग्ध बाबाओं को भी नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियां तुरंत बंद करें, वरना कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
चमत्कार के नाम पर चल रहा यह खेल दरअसल खौफ और अंधविश्वास का ऐसा जाल था, जिसमें मासूम बच्चे और उनके परिवार फंसते जा रहे थे.
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मामला अकोला के मूर्तिजापुर तहसील के निंभा गांव का है. यहां कई साल से चेतन सुनील उर्फ गुलाल शेष बाबा अपना दरबार सजाता था. खुद को शक्तियों से संपन्न बताने वाला यह युवक लोगों की बीमारियां, पारिवारिक समस्याएं और बाधाएं दूर करने का दावा करता था. गांव के लोग भी उसके दावों पर यकीन करते थे और अपने बच्चों को उसके पास इलाज के लिए ले जाते थे. लेकिन इस तथाकथित इलाज का सच रोंगटे खड़े कर देने वाला है.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जो तस्वीरें सामने आईं, वे किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक हिला देने के लिए काफी हैं. वीडियो में देखा गया कि बाबा छोटे बच्चों को उनके कपड़ों से पकड़कर हवा में झुला रहा है. कुछ क्लिप्स में वह बच्चों को दांतों से उठाता नजर आता है.
इतना ही नहीं, कथित तौर पर बच्चों को कीलों से बने आसन पर बैठाया जाता था और इसे उपचार बताया जाता था. इन खतरनाक करतूतों को चमत्कार और देवीय शक्ति का रूप देकर लोगों को गुमराह किया जा रहा था.
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ, जब एक इंस्टाग्राम रील के जरिए यह वीडियो सामने आया. अकोला की बाल कल्याण समिति (CWC) की सदस्य प्रांजली जैस्वाल ने इस वीडियो को देखा और उन्हें इसमें कुछ बेहद आपत्तिजनक लगा. उन्होंने इसकी पुष्टि की और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत के आधार पर पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया. पुलिस का कहना है कि आरोपी का यह कृत्य बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा करने वाला है. साथ ही यह अंधविश्वास फैलाकर लोगों को भ्रमित करने का भी मामला है.
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गांव में जब मीडिया और जांच टीम पहुंची, तो कई लोगों ने ऑफ कैमरा इस बाबा की करतूतों को लेकर बात की. हालांकि, कैमरे के सामने आने से अधिकांश लोग कतराते नजर आए.
यह डर और अंधविश्वास का वही माहौल है, जो ऐसे भोंदू बाबाओं को फलने-फूलने का मौका देता है. हैरानी की बात यह भी है कि सिर्फ निंभा गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी इस तरह के कई दरबार लगते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, गांव में एक-दो नहीं बल्कि कई ऐसे बाबा हैं, जो अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं.
इस पूरे मामले पर अंधश्रद्धा निर्मूलन से जुड़े संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि यह सिर्फ अंधविश्वास का मामला नहीं, बल्कि बच्चों के साथ हो रही गंभीर हिंसा है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त और तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि अंधविश्वास फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. मूर्तिजापुर क्षेत्र में कई संदिग्ध बाबाओं को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है.
धनंजय साबले