हाथ में तलवार लेकर घोड़ी पर निकली ग्रेजुएट दुल्हन, लोग बोले- रानी लक्ष्मीबाई का रूप, वीडियो

महाराष्ट्र के अकोला में एक अनोखी शादी चर्चा में है. यहां ग्रेजुएट दुल्हन प्राची ठाकुर अपनी ही बारात में घोड़ी पर सवार होकर निकलीं. रानी लक्ष्मीबाई के रूप में सजी प्राची ने हाथ में तलवार लेकर बेटी और बेटे की बराबरी का संदेश दिया. इस अनोखी बारात को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.

Advertisement
घोड़ी पर निकली दुल्हन की बारात (Photo:  Dhananjay B.Sable/ITG) घोड़ी पर निकली दुल्हन की बारात (Photo: Dhananjay B.Sable/ITG)

धनंजय साबले

  • अकोला ,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:05 AM IST

महाराष्ट्र के अकोला शहर में एक अनोखी और प्रेरणादायक शादी देखने को मिली, जहां दुल्हन अपनी ही बारात में घोड़ी पर सवार होकर निकली. इस अनूठे नजारे ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया.

दुल्हन प्राची ठाकुर ग्रेजुएट हैं और उनकी इच्छा थी कि शादी में वही परंपरा निभाई जाए जो आमतौर पर दूल्हे के लिए होती है. यानी घोड़ी पर बारात निकालना. बेटी की इस इच्छा को सम्मान देते हुए उनके पिता और पूरे ठाकुर परिवार ने इसे खुशी खुशी स्वीकार किया.

Advertisement

दुल्हन की इच्छा पर परिवार ने निभाई अनोखी परंपरा

बारात के दौरान प्राची ठाकुर रानी लक्ष्मीबाई के रूप में सजी हुई नजर आईं. उन्होंने हाथ में प्रतीकात्मक तलवार थाम रखी थी और पूरे आत्मविश्वास के साथ घोड़ी पर सवार होकर बारात में शामिल हुईं. डीजे की धुन पर परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और दोस्त झूमते हुए इस अनोखी बारात का हिस्सा बने.

इस दृश्य को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जमा हो गई. कई लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया और देखते ही देखते इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे.

परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनके परिवार में बेटियों को बेटों के बराबर सम्मान और अधिकार दिया जाता है. इसी सोच के चलते प्राची की इच्छा को पूरा किया गया, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि बेटा और बेटी में कोई भेद नहीं है.

Advertisement

अकोला में अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय

अकोला में दुल्हन की घोड़ी पर निकली यह बारात अब महिला सशक्तिकरण और समानता के प्रतीक के रूप में देखी जा रही है. इस अनोखी शादी ने समाज को यह संदेश दिया कि बदलते दौर में परंपराओं को नई सोच के साथ अपनाकर बेटियों को भी बराबरी का सम्मान दिया जा सकता है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement