मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के 27 क्षेत्रों के उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की तलाश कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है. पार्टी सक्षम और जनाधार वाले उम्मीदवारों की तलाश में जुटी हुई है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में अधिकांश इलाकों में जीते उसके तत्कालीन विधायक अब भाजपा के उम्मीदवार बनने वाले हैं.
राज्य में कांग्रेस उप-चुनाव के जरिए जीत हासिल कर फिर सत्ता में लौटने का मंसूबा बनाए हुए है. पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ कह चुके हैं कि उप-चुनाव में प्रदेश की जनता बिकाऊ लोगों को सबक सिखाएगी.
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विधानसभा उप-चुनाव को लेकर कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और जनाधार वाले नेताओं की तलाश में लगी है. समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस अब तक तीन से ज्यादा सर्वेक्षण करा चुकी है. इस सर्वेक्षण में पार्टी ने विधानसभा स्तर पर जातीय समीकरण, पार्टी के दावेदार नेताओं, आवेदन करने वालों के साथ ही उन लोगों के संदर्भ में भी जानकारी जुटाई है जो फिलहाल भाजपा में हैं और असंतुष्ट चल रहे हैं.
कांग्रेस के प्रवक्ता अजय सिंह यादव का कहना है कि यह बात सही है कि पार्टी उम्मीदवार चयन को लेकर सर्वेक्षण करा चुकी है, अभी भी यह क्रम जारी है. उप-चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाएगा, दल बदल करने वालों को लेकर प्रदेश की जनता में असंतोष है और वह उप-चुनाव में सबक सिखाते हुए कांग्रेस का साथ देगी.
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बता दें कि राज्य में मार्च में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 तत्कालीन विधायकों ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था, जिससे कमलनाथ की सरकार गिर गई थी और भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिला.
इसके बाद तीन और विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफो देकर भाजपा का दामन थाम लिया था. वहीं दो विधायकों का निधन होने से स्थान खाली पड़ा हुआ है, इस तरह राज्य में 27 विधानसभा क्षेत्रों में उप-चुनाव होने वाले हैं.
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