झारखंड में बीते दो हफ्तों के भीतर हाथियों के हमलों में 23 लोगों की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इस गंभीर मुद्दे को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस हुई, जहां सरकार से ठोस नीति बनाने, मुआवजा बढ़ाने और हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई.
सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायक रामेश्वरम उरांव ने कहा कि लगातार बढ़ रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब हाथियों को लेकर एक स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि यह केवल मानव सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व को बचाने की भी चुनौती है. अगर समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया तो हालात और भयावह हो सकते हैं.
उरांव ने मुआवजे के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि झारखंड में हाथी के हमले में मौत पर फिलहाल 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जबकि पड़ोसी ओडिशा में यह राशि 10 लाख रुपये तक है. ऐसे में राज्य सरकार को मुआवजा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों को पर्याप्त सहायता मिल सके.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार हाथियों के लिए एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है, और क्या घायल हाथियों के इलाज के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू की जाएगी. उनका कहना था कि जब हाथियों का झुंड आबादी वाले इलाकों में घुस आता है तो अक्सर पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम बुलानी पड़ती है, जिससे समय की देरी होती है और नुकसान बढ़ जाता है.
मामले पर जवाब देते हुए राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार ने स्वीकार किया कि स्थिति चिंताजनक है और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी कर रही है. उन्होंने बताया कि ओडिशा में हाथियों से मौत पर 6 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है और झारखंड सरकार भी अन्य राज्यों जैसे असम और ओडिशा का अध्ययन कर मुआवजा राशि तय करने पर विचार कर रही है.
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मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल राज्य के पास प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की कमी है, जिसे जल्द ही दूर किया जाएगा. इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया जा रहा है, ताकि किसी भी हमले की स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया जा सके.
इसके अलावा सरकार दो मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू करने पर भी विचार कर रही है, जिससे घायल हाथियों का समय पर इलाज किया जा सके. मंत्री ने कहा कि हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए एलिफेंट कॉरिडोर में भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि हाथियों को जंगल छोड़कर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर न जाना पड़े.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताई चिंता
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय बदलाव हाथियों के व्यवहार में बदलाव का एक बड़ा कारण है. सरकार इस पूरे मसले को एक 'होलिस्टिक अप्रोच' के साथ देख रही है और जल्द ही एक विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी घटना के बाद कम से कम समय में मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाए. साथ ही एलिफेंट कॉरिडोर में हो रही अवैध खनन गतिविधियों पर भी सख्ती से नजर रखी जाएगी.
मंत्री बोले- छह कुनकी हाथी मंगाए गए हैं
मंत्री सुदिव्य कुमार ने यह भी बताया कि हाथियों को नियंत्रित करने और रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावी बनाने के लिए तमिलनाडु से छह 'कुनकी हाथी' मंगाए जा रहे हैं. ये प्रशिक्षित हाथी होते हैं, जिनकी मदद से जंगली हाथियों को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जाता है.
झारखंड में हाथी-मानव संघर्ष अब एक गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय संकट बन चुका है. पिछले दो हफ्तों में 23 मौतें इस बात का संकेत हैं कि मौजूदा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह एक ऐसी नीति तैयार करे, जो एक तरफ इंसानों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दूसरी तरफ वन्यजीवों के संरक्षण को भी संतुलित रखे.
सत्यजीत कुमार