सर्दी, जुकाम और बुखार...14 दिन में 20 लोगों की मौत, इस गांव में जाने से भी डरने लगे लोग

पलवल के छैंसा गांव में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के बीच दो हफ्तों में 20 से ज्यादा लोगों की मौत से दहशत फैल गई है. लोग अब इस गांव में जाने से भी कतराने लगे हैं. प्रशासन ने गांव में हेल्थ कैंप लगाकर बड़े स्तर पर ब्लड टेस्टिंग शुरू कर दी है. वहीं ग्रामीण बीमारी के पीछे दूषित पानी को जिम्मेदार बता रहे हैं. प्रशासन संक्रमण रोकने और बीमारी की असली वजह पता लगाने में जुटा है.

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पलवल के छैंसा गांव में हेपेटाइटिस का कहर (Photo: ITG) पलवल के छैंसा गांव में हेपेटाइटिस का कहर (Photo: ITG)

aajtak.in

  • पलवल,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:20 PM IST

हरियाणा के पलवल जिले के छैंसा गांव में लोगों की लगातार हो रही मौत के बाद अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग इस गांव में जाने से भी डरने लगे है और इसे 'मौत का गांव' बताने लगे हैं. इस गांव में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात हो गए हैं. पिछले दो सप्ताह में गांव में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से कई लोगों में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टि हुई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू कर दिया है.

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लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में घर-घर जाकर लोगों के ब्लड सैंपल ले रही है और उन्हें पीलिया, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच के लिए भेजा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, उन्हें तुरंत अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जा रहा है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. शुरुआती तौर पर रोगियों में सर्दी, जुकाम और बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं जिसके बाद मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है.

गांव में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात

स्वास्थ्य शिविर के नोडल अधिकारी वासुदेव गुप्ता के अनुसार हेपेटाइटिस-बी संक्रमित खून, संक्रमित सुई के इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंधों के जरिए फैलता है. अधिकारियों ने आशंका जताई है कि कुछ मामले नशे के दौरान साझा सुई के इस्तेमाल से जुड़े हो सकते हैं, जबकि कुछ मामलों का संबंध प्रवासी मजदूरों और ट्रक चालकों से जुड़े हाई रिस्क व्यवहार से भी हो सकता है. प्रशासन गांव में जागरूकता अभियान भी चला रहा है और लोगों को जांच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

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वहीं दूसरी ओर गांव के लोग बीमारी के पीछे दूषित पानी को कारण मान रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि गुरुग्राम नहर में औद्योगिक कचरे के कारण पानी दूषित हो गया है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं. हालांकि प्रशासन ने अभी तक पानी को बीमारी का कारण नहीं माना है और जांच जारी है.

हेपेटाइटिस या दूषित पानी? मौतों की वजह अभी साफ नहीं

इस बीच बीमारी का अमानवीय पहलू भी सामने आया है. गांव के 14 साल के एक लड़के सारिक की पिछले सप्ताह मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला और आईसीयू बेड की कमी के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई.

प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है. एक तरफ हेपेटाइटिस संक्रमण को रोकना और दूसरी तरफ दूषित पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान करना. फिलहाल गांव में बड़े स्तर पर जांच अभियान जारी है और स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

 

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इनपुट - पीयूष

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