हरियाणा के पलवल जिले के गांव छांयसा में लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है. जनवरी के आखिरी सप्ताह से फरवरी के दूसरे सप्ताह तक गांव में कई लोगों की मौत हुई. इन मौतों के बाद आजतक की टीम छांयसा गांव पहुंची और पीड़ित परिवारों से मिलकर जानने की कोशिश की कि इन घटनाओं में क्या समानता है.
टीम ने उन घरों का दौरा किया जहां मौतें हुईं और परिजनों से बात कर यह समझने का प्रयास किया कि मौत से पहले मरीजों में कौन से लक्षण दिखाई दिए थे. परिजनों के अनुसार ज्यादातर मामलों में पेट दर्द, बुखार, उल्टी, कमजोरी और लीवर खराब होने जैसी बातें सामने आईं.
पहली मौत 27 जनवरी
गांव में पहली मौत 14 साल के सारिक की हुई. सारिक कक्षा 6 का छात्र था. परिजनों के अनुसार 26 जनवरी को उसे पेट दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. अगले दिन 27 जनवरी को उसकी मौत हो गई.
दूसरी मौत 29 जनवरी
दूसरी मौत 9 साल के हुफैज की हुई. वह चौथी कक्षा का छात्र था. परिजनों ने बताया कि रात को अचानक उसका बीपी बढ़ गया. उसे पलवल के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से दो घंटे बाद फरीदाबाद रेफर कर दिया गया. 29 जनवरी को निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई. बताया गया कि उसका लीवर खराब हो गया था.
तीसरी मौत 3 फरवरी
तीसरी मौत 15 साल की हुमा की हुई. हुमा ने 10वीं तक पढ़ाई की थी. 30 जनवरी को उसे पेट दर्द, बुखार और उल्टी की शिकायत हुई. परिवार उसे मेवात के नल्लड़ मेडिकल कॉलेज लेकर गया, जहां भर्ती किया गया. हालत लगातार बिगड़ती रही और 3 फरवरी को उसकी मौत हो गई.
चौथी मौत 4 फरवरी
चौथी मौत 65 साल की जमीला की हुई. 28 जनवरी को उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई. बेटे नूर मोहम्मद ने उन्हें इलाज के लिए नल्लड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया. 4 फरवरी की रात उनकी मौत हो गई.
पांचवी मौत 4 फरवरी
इसी दिन शमशुद्दीन की भी मौत हुई. परिजनों के अनुसार 28 जनवरी को उसे बुखार हुआ था. 4 फरवरी को गुरुग्राम के अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई.
छठी मौत 5 फरवरी
छठी मौत 7 साल की पायल की हुई. परिवार ने बताया कि 1 फरवरी को उसे बुखार हुआ था. पहले गांव के डॉक्टर से दवा ली गई, फिर दूसरे डॉक्टर से इलाज कराया गया. आराम नहीं मिलने पर 4 फरवरी को हथीन सरकारी अस्पताल ले जाया गया. वहां से पलवल और फिर नल्लड़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. 5 फरवरी को उसकी मौत हो गई.
सातवीं मौत 11 फरवरी
सातवीं मौत 22 साल के दिलशाद की हुई. परिजनों ने बताया कि 1 फरवरी को उसे बुखार और पेट दर्द शुरू हुआ. 10 फरवरी को नल्लड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया और अगले दिन 11 फरवरी को उसकी मौत हो गई. मृतक जमीला के बेटे वसीम ने बताया कि उनकी मां को लीवर की दिक्कत थी. आखिरी दिनों में हालत ज्यादा खराब हो गई और उनकी मौत हो गई.
मृतका हुमा के चाचा परवेज ने कहा कि भतीजी को पेट दर्द, उल्टी और हल्का बुखार था. हालत बिगड़ने पर नल्लड़ मेडिकल कॉलेज ले गए. तीन दिन भर्ती रहने के बाद उसे दौरे पड़ने लगे थे. मृतक शमशुद्दीन की मां सकीना ने बताया कि बेटे को चार दिन तक बुखार रहा. उसे फरीदाबाद और गुरुग्राम के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका.
मृतक पायल की दादी महेंद्री ने कहा कि पोती को बुखार था और हालत बिगड़ने पर नल्लड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने स्पष्ट नहीं बताया कि उसे क्या हुआ. मृतक जमीला के बेटे नूर मुहम्मद ने बताया कि उनकी मां को पहले बुखार हुआ जो ठीक हो गया, लेकिन फिर अचानक उन्होंने बोलना बंद कर दिया. डॉक्टरों ने कहा कि लीवर खराब हो गया है.
समान लक्षणों ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
गांव में हुई इन मौतों में परिजनों द्वारा बताए गए लक्षण काफी हद तक एक जैसे रहे. ज्यादातर मरीजों को बुखार, पेट दर्द, उल्टी और लीवर से जुड़ी परेशानी बताई गई. कई मरीजों को पलवल से रेफर कर नल्लड़ मेडिकल कॉलेज भेजा गया. बात दें, छांयसा गांव में 20 दिन में 15 मौतें से दहशत का माहौल बना हुआ है. हर कोई यह जानने की कोशिश में लगा है कि आखिर इतने कम समय में एक ही गांव में इस तरह की घटनाएं क्यों हुईं.
सचिन गौड़