खेतों पर चला प्रशासन का ट्रैक्टर... समय से पहले लगाई गई धान की पौध नष्ट; किसानों को भारी नुकसान, जानें क्या है नियम

हरियाणा के करनाल में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की. संगोहा गांव में 7 एकड़ से ज्यादा धान की पौध को ट्रैक्टर से नष्ट किया गया. 15 मई से पहले बिजाई करने पर प्रशासन ने दिखाया सख्त रुख.

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करनाल में कृषि विभाग ने दी नियम तोड़ने की बड़ी सजा.(Photo:Screengrab) करनाल में कृषि विभाग ने दी नियम तोड़ने की बड़ी सजा.(Photo:Screengrab)

aajtak.in

  • करनाल ,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:13 PM IST

हरियाणा के करनाल जिले में गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. कृषि विभाग ने पुलिस बल के साथ मिलकर संगोहा गांव और आसपास के इलाकों में छापेमारी की, जहां 'हरियाणा प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सॉइल वाटर एक्ट-2009' का उल्लंघन कर समय से पहले लगाई गई धान की पौध को ट्रैक्टर चलाकर और स्प्रे करके नष्ट कर दिया गया.

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कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, करनाल क्षेत्र में पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. धान की फसल में पानी की खपत बहुत अधिक होती है.

सरकार और कोर्ट के आदेशानुसार, कोई भी किसान 15 मई से पहले धान की पौध तैयार नहीं कर सकता और 15 जून से पहले खेतों में धान की रोपाई नहीं कर सकता. 

कुछ किसान अधिक मुनाफे के चक्कर में अगेती (समय से पहले) पौध तैयार कर उसे बेचने या अपने खेतों में लगाने का काम कर रहे थे. 

7 एकड़ से ज्यादा पौध पर चला ट्रैक्टर
संगोहा गांव के पास विभाग ने लगभग 7 एकड़ से ज्यादा जमीन पर तैयार की जा रही धान की पौध पर कार्रवाई की.

कृषि विभाग के अधिकारी अमरजीत सिंह ने बताया कि उप-निदेशक डॉ. वजीर सिंह के निर्देशों पर यह कार्रवाई अमल में लाई गई है. जो पौध तैयार थी, उसे ट्रैक्टर से जुताई कर मिट्टी में मिला दिया गया.

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'पानी बचाना जरूरी'
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि किसानों को लगातार जागरूक किया जाता है कि वे समय से पहले बिजाई न करें. प्रशासन का उद्देश्य किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है.

विभाग ने सख्त संदेश दिया है कि जो भी किसान कानून का उल्लंघन कर समय से पहले धान की अगेती खेती करेगा, उसके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी.

किसानों में हड़कंप
प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के किसानों में हड़कंप मच गया है. जहां एक तरफ विभाग इसे जल संरक्षण के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है.

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