गुरुग्राम: डायबिटीज के नकली इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

गुरुग्राम पुलिस ने नकली एंटी डायबिटीज के इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड और उसके एक अन्य साथी को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस को आरोपी के पास से भारी मात्रा में नकली इंजेक्शन मिले हैं, जिनकी कीमत 70 लाख रुपये बताई जा रही है.

Advertisement
गुरुग्राम में डायबिटीज की नकली दवा सप्लाई करने वाले गिरोह का खुलासा. (photo: ITG) गुरुग्राम में डायबिटीज की नकली दवा सप्लाई करने वाले गिरोह का खुलासा. (photo: ITG)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

गुरुग्राम पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने ज्वाइंट ऑपरेशन में नकली मुंजेरो इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस टीम ने गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने बताया कि ये लोग गुरुग्राम के सेक्टर 69 में स्थित एक फ्लैट में नकली इंजेक्शन तैयार करते थे और उन्हें पॉश इलाके में सप्लाई करने वाले थे. पुलिस अब इस गिरोह के नेटवर्क और सप्लाई चैन की जांच कर रही है, ताकि नकली दवाओं की सप्लाई को रोका जा सके.

पुलिस ने बताया कि बीते दिनों नकली मुंजेरो इंजेक्शन सप्लाई करने वाले गिरोह के बारे में सूचना मिली थी. सूचना के आधार पर गिरोह के मास्टरमाइंड और सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की एक संयुक्त टीम तैयार की गई, जिसने शनिवार को नकली इंजेक्शन बनाने वाले मास्टरमाइंड अमिश शर्मा और उसके एक अन्य साथी को दबोच लिया.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से करीब 70 लाख रुपये की कीमत के नकली इंजेक्शन मिले हैं. पुलिस का कहना है कि दिल्ली के भागीरथ पैलेस से ये सप्लायर गुरुग्राम के पॉश इलाके में स्थित गलेरिया मार्केट में सप्लाई करने वाला था.

Advertisement

'इटली से इम्पोर्ट होता है इंजेक्शन'

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 'मुंजेरो' इंजेक्शन मूल रूप से इटली से भारत इम्पोर्ट किया जाता है. इसका इस्तेमाल एंटी-डायबिटिक मरीज डायबिटीज कंट्रोल के लिए करते हैं, लेकिन आजकल इसका चलन अमीर लोगों में वजन कम करने को लेकर काफी बढ़ गया है. इसी मांग का फायदा उठाते हुए आरोपी नकली इंजेक्शन का जाल बिछाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे थे.

पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ये खतरनाक नेक्सस कितना बड़ा है और नकली माल कहां-कहां सप्लाई किया जा रहा था.

ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारी ने आजतक को बताया कि असली और नकली की ब्रांडिंग में बड़ा अंतर होता है. असली इंजेक्शन को 2 से 8 डिग्री तापमान में सप्लाई किया जाता है, लेकिन बरामद इंजेक्शन बिना किसी मानक के सप्लाई किए जा रहे थे. इन मानकों की कमी ही नकली होने के सबसे पक्के सबूत साबित हुए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement