गुजरात के सूरत में बुधवार को गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर एक बड़ा और अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला. शहर में निकाली गई विशाल रैली में हजारों की संख्या में गौ भक्त, व्यापारी, महिलाएं, साधु-संत और गौ सेवा से जुड़े लोग शामिल हुए. इस दौरान केंद्र सरकार से गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, गौ रक्षा के लिए सख्त केंद्रीय कानून बनाने और अलग से गौ संवर्धन मंत्रालय की स्थापना करने की मांग उठाई गई. इस पूरे अभियान की सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब 10 प्रमुख व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अपने खून से पत्र लिखा. व्यापारियों ने सीरिंज के जरिए अपना खून निकालकर यह पत्र तैयार किया. इस पत्र में गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की गई. साथ ही देशभर में गौ हत्या पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील भी की गई.
यह रैली अठवागेट स्थित वनिता विश्राम ग्राउंड से शुरू होकर कलेक्टर कचहरी तक निकाली गई. रैली में शामिल लोगों के हाथों में भगवा झंडे, गौ माता के पोस्टर और बैनर थे. पूरे रास्ते गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो, गो-वध बंद करो और गौ रक्षा राष्ट्र रक्षा जैसे नारे गूंजते रहे. रैली में बुलडोजर भी शामिल किए गए थे. आयोजकों के मुताबिक यह गौ हत्या करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रतीक था. इसके अलावा 8 से 10 बैलगाड़ियां भी रैली का हिस्सा बनीं, जिन्हें गौ-भक्ति और भारतीय परंपरा का प्रतीक बताया गया.
‘गौ माता को राष्ट्रमाता’ बनाने की मांग तेज
इस अभियान में बड़ी संख्या में साधु-संतों और महंतों ने हिस्सा लिया. संतों ने कहा कि यह सिर्फ एक मांग नहीं बल्कि गौ-भक्तों का संकल्प है. उनका कहना था कि गाय भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आस्था का केंद्र रही है और अब उसे संवैधानिक रूप से राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए. देशभर में चल रहे राष्ट्रीय गौ सम्मान आवाहन अभियान के तहत आयोजित इस रैली में शामिल लोगों ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है. यह संतों की प्रेरणा से शुरू हुआ एक राष्ट्रव्यापी जन अभियान है, जिसे शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है.
अभियान से जुड़े ललित शर्मा ने बताया कि पूरे भारत में यह अभियान 27 अप्रैल से शुरू हुआ था. गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों के कारण यह कार्यक्रम 7 मई को आयोजित किया गया. उन्होंने कहा कि सूरत में अब तक 5 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर जुटाए जा चुके हैं. इन हस्ताक्षरों के साथ एक औपचारिक आवेदन पत्र जिला कलेक्टर को सौंपा गया है, जिसे आगे प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजा जाएगा. ललित शर्मा ने कहा कि खून से लिखा गया पत्र प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा. उनका कहना था कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए और भारत भूमि को गौ हत्या के कलंक से मुक्त किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि गौ संवर्धन मंत्रालय की स्थापना जरूरी है ताकि सड़कों पर भटकने वाली गायों की रक्षा की जा सके.
उन्होंने कहा कि देश में इस समय हर तरफ भगवा ध्वज वाली सरकारें हैं और हिंदूवादी सरकारों को सनातन संस्कृति की रक्षा करने वाली सरकार माना जाता है. ऐसे समय में गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी वर्ष 1945 में गौ रक्षा की बात कही थी और अब समय आ गया है कि इस दिशा में बड़ा फैसला लिया जाए. रैली में शामिल सद्भावना गौ सेवा ट्रस्ट की संचालक ज्योति बुबना ने भी केंद्र सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि गौ माता देश की संस्कृति और आस्था का प्रतीक है. उन्होंने दावा किया कि प्रतिदिन हजारों गायों की हत्या हो रही है और इसे रोकने के लिए सख्त कानून जरूरी है.
भगवा झंडे और बुलडोजर के साथ निकली विशाल रैली
ज्योति बुबना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद कई बड़े फैसले लिए हैं, लेकिन अब गौ माता को भी आजादी और सम्मान देने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कर उन्हें जीने का अधिकार दिया जाना चाहिए. सूरत की सड़कों पर निकली इस विशाल रैली ने एक बार फिर देशभर में गौ रक्षा और गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की बहस को तेज कर दिया है.
संजय सिंह राठौर