जिस आंचल में पला, उसे ही खून से रंगा! नानी की हत्या कर पोते ने रची थी खुदकुशी की कहानी, मर्डर के बाद बहाए घड़ियाली आंसू

'नानी' यानी माता की मां. मतलब दो मां के बराबर वात्सल्य, स्नेह, प्यार उड़ेलने वाली नारी. जीते जी स्वर्ग किसी ने भले ही न देखा हो, मगर नानी के घर का महत्व कुछ कुछ स्वर्ग जैसा है, नानी घर की बात ही कुछ निराली है. मगर उसी ममतामयी नानी को नाती ने मौत के घाट उतारा तो इस खबर को सुनने-पढ़ने वालों का दिल रह गया. पढ़ें इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी रिपोर्ट...

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बेरोजगारी पर टोका तो 'कलयुगी' नाती बना हैवान.(Photo:ITG) बेरोजगारी पर टोका तो 'कलयुगी' नाती बना हैवान.(Photo:ITG)

संजय सिंह राठौर

  • सूरत,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:19 PM IST

'नानी'… यह सिर्फ एक रिश्ता नहीं होता. यह मां की ममता का दूसरा रूप होती है. वह हाथ, जो बचपन में माथा सहलाते हैं. वह आंगन, जहां गर्मियों की छुट्टियां किसी जन्नत से कम नहीं लगतीं. वह रसोई, जहां बिना मांगे थाली सज जाती है. और वह दिल… जो अपने बच्चों से ज्यादा अक्सर नाती-पोतों के लिए धड़कता है.

लेकिन गुजरात के सूरत शहर से आई एक खबर ने इस रिश्ते की पवित्रता को खून से रंग दिया. एक 23 साल के युवक ने अपनी ही 70 वर्षीय नानी का गला काटकर हत्या कर दी. वजह थी कि नानी अपने नाती से बार-बार काम करने के लिए कहती थीं. यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, यह उस ममता का कत्ल था, जिसने 10 साल तक एक बेटे की तरह उसे पाला था.

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घटना पर्वत पाटिया स्थित अनमोल कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल की है. गुरुवार की दोपहर घर में सन्नाटा था. 70 वर्षीय लीला बेन और उनका नाती हर्ष निलेशभाई पटेल घर पर अकेले थे. हर्ष की बहन विधि और उसकी पत्नी रिंकल सुबह 9:00 बजे अपने काम पर निकल चुकी थीं.।

हर्ष, जो लंबे समय से बेरोजगार था, घर पर सो रहा था. दोपहर करीब 12:00 से 12:30 के बीच नानी लीला बेन ने उसे हमेशा की तरह टोकते हुए कहा, "तू अब बड़ा हो गया है, कब तक ऐसे निकम्मा बैठा रहेगा? कुछ काम-धंधा कर, अपनी बहन और पत्नी के भविष्य के बारे में सोच."

बस यही नसीहत हर्ष के सिर पर खून बनकर सवार हो गई. वर्षों से मन में जमा 'इरिटेशन' और गुस्से ने उसे अंधा कर दिया. वह रसोई से सब्जी काटने वाला चाकू उठा लाया और निहत्थी, बुजुर्ग नानी पर हमला कर दिया. इससे पहले कि लीला बेन कुछ समझ पातीं, हर्ष ने उनके गले पर गहरा वार कर दिया. लीला बेन लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ीं और कुछ ही मिनटों में उनकी सांसें थम गईं.

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नानी का नाती ने रेत दिया गला.

'मगरमच्छ के आंसू' और मनगढ़ंत कहानी

हत्या के बाद हर्ष ने कानून से बचने के लिए एक शातिर अपराधी की तरह 'ड्रामा' रचा. जब पड़ोसी और पुलिस पहुँचे, तो हर्ष ने रोने का नाटक करते हुए कहानी सुनाई कि नानी काफी समय से मानसिक रूप से परेशान थीं और उन्होंने खुद पर चाकू से हमला कर आत्महत्या कर ली. उसने यहां तक कहा कि नानी को रोकने की कोशिश में उसे भी मामूली खरोंचें आईं.

लेकिन खून के छींटे, घटनास्थल की स्थिति और उसके बयान में विरोधाभास पुलिस की नजर से बच नहीं सके. पुलिस की सख्ती के सामने झूठ टूट गया. पुणा थाना पुलिस ने जब हर्ष से सख्ती से पूछताछ की तो उसका झूठ ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया. आखिरकार उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया. उसने माना कि वह नानी की रोज-रोज की टोका-टाकी से परेशान था और गुस्से में उसने हत्या कर दी. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया है.

जिसने मां बनकर पाला… उसी को मार डाला

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि लीलाबेन की जिंदगी की कहानी है. हर्ष की मां ने दूसरी शादी कर ली थी और अलग रहती थी. ऐसे में पिछले करीब 10 साल से लीलाबेन ही हर्ष और उसकी बहन का पालन-पोषण कर रही थीं. उन्होंने मां बनकर दोनों बच्चों को संभाला. छत दी. खाना दिया और जीवन दिया. लेकिन उसी नाती ने मामूली गुस्से में उनकी जिंदगी छीन ली.

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DCP ने क्या बताया?

सूरत पुलिस के डीसीपी अजीत सिंह परमार के मुताबिक, ''नाती और नानी के बीच रोज इस बात को लेकर विवाद होता था कि वह कोई काम नहीं करता. घटना वाले दिन भी बहस हुई और गुस्से में आकर युवक ने चाकू से गले पर वार कर हत्या कर दी.'' उन्होंने बताया कि परिवार के बाकी सदस्य काम पर गए हुए थे और घर में सिर्फ नानी और नाती मौजूद थे.

यह सिर्फ क्राइम नहीं… समाज का आईना भी है. यह घटना सिर्फ एक हत्या की खबर नहीं है. यह उस टूटते पारिवारिक ढांचे का आईना है, जहां सलाह अब अपमान लगने लगी है, जहां जिम्मेदारी से भागता युवा गुस्से को हथियार बना रहा है और जहां सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाने वाला रिश्ता भी अब खून से रंगने लगा है.

जिस नानी का घर कभी स्वर्ग जैसा लगता था, उसी घर में अब पुलिस की पीली पट्टी लगी है, और उस आंगन में, जहां कभी दुआएं मिलती थीं, अब सिर्फ मातम पसरा है. 

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